Sunday, 19 July 2020

July 19, 2020

kin cheezon se wazu toot jata hai

वजू किन-किन चीजों से टूट जाता है

वजू किन-किन चीजों से टूट जाता है
Wazu todne wali cheezen

मसअला :- (1) पेशाब , पाखाने और पेट की हवा निकलने से वुजू टूट जाता है । अगर आगे ( पेशाब करने की हिस्सा) से कोई कीड़ा जैसे केंचुआ कंकरी वगैरा निकले तब भी वुजू टूट जाता है।
मसअलह :- (2) अगर किसी के ज़ख्म में से कोई कीड़ा निकले , या कान या जख्म में से गोश्त का कोई हिस्सा कट कर गिरा, मगर खून नहीं निकला तो इससे वुजू नहीं टूटता ।
मसअलह :- (3)  अगर किसी ने इंजेक्शन से खून निकलवाया। या नाक से खून गिरा या चोट लगी और खून व पीप निकले तो वुजू टूट गया । लेकिन अगर खून पीप ज़ख्म के मुंह पर ही दिखाई दे और आगे न बढ़े तो वुजू ठीक रहा । अगर किसी के सूई चुभ गई और उस जगह से खून निकला मगर बहा नहीं तो वुजू नहीं टूटा लेकिन अगर थोड़ा सा भी अपनी जगह से यह बढ़ा तो वुजू टूट गया ।
वजू किन-किन चीजों से टूट जाता है
Blood from a vein
वजू किन-किन चीजों से टूट जाता है
खून निकला बहा नहीं

मसअलह :- (4) अगर किसी ने अपनी नाक में उंगली डाली और उसे बाहर निकालने पर उंगली में खून का धब्बा मालूम हुआ लेकिन वह खून बस इतना ही है कि उंगली में थोड़ा सा लगा , बहा नहीं तो वुजू नहीं टूटा ।
मसअलह :- (5) किसी की आंख के अन्दर कोई दाना फूट गया और उस का पानी या पीप आंख में फैल गया , मगर बाहर नहीं निकल सका तो वुजू नहीं टूटा । लेकिन अगर आंख से बाहर पानी या पीप निकल पड़ा तो वुजू टूट गया । इसी तरह अगर कान के अन्दर कोई दाना है और वह फट गया तो जब तक खून या पीप उस जगह तक सूराख़ के अन्दर रहे जहां नहाते वक्त पानी पहुंचाना फर्ज नहीं है , तब तक वुजू नहीं टूटता । लेकिन अगर खून पीप बह कर ऐसी जगह आ जाये जहां पानी पहुंचाना फर्ज है तो वुजू टूट जाएगा ।
वजू किन-किन चीजों से टूट जाता है

मसअलह :- (6) अगर किसी ने अपने फोड़े या छाले के ऊपर का छिलका नोच डाला और उसके नीचे खून या पीप दिखाई देने लगा लेकिन किसी तरफ निकल कर बह न सका, तो वुजू ठीक रहा । लेकिन बह पड़ा तो वुजू टूट जाएगा ।
मसअलह :- (7) किसी के फोड़े में बड़ा गहरा घाव हो गया तो जब तक खून व पीप ज़ख्म के सुराख के अन्दर ही अन्दर रहे , बाहर निकल कर बदन पर न आए तो वुजू नहीं टूटता ।
मअलह :- (8) अगर फोड़े फुन्सी का खून अपने आप नहीं निकला बल्कि उसे दबा कर निकाला गया और बहने लगा तब वुजू टूट जाएगा ।
मसअलह :- (9) किसी के घाव से थोड़ा थोड़ा पीप और खून निकलने लगा और उसने उसे कपड़े से साफ कर लिया । थोड़ी देर बाद फिर निकला और फिर उसने साफ कर लिया । इस तरह कई बार ऐसा हुआ तो दिल में सोचे कि अगर ऐसा मालूम हो कि साफ न किया जाता तो बह पड़ता तब वुजू टूट जाएगा , लेकिन अगर ऐसा मालूम हो कि साफ न किया जाता तब भी न बहता तो वुजू न टूटेगा ।
मसअलह :- (10) अगर किसी के थूक में खून मालूम हुआ और थूक सफेद या पीले रंग का है तो वुजू नहीं टूटा । लेकिन अगर थूक में खून ज़्यादा निकला और उसकी रंगत सुर्ख यानि लाल है तो वुजू टूट गया ।
मसअलह :- (11) अगर दांत से कोई चीज़ काटने पर खून का धब्बा मालूम हुआ या दांत या दाढ़ कुरेदा और ख़िलाल किया (जो गोश्त या कोई ऐसी चीज़ खाते वक़्त दाँतों में फँस जाती है उस को पतली तिंका वग़ैरा से निकाल को खिलाल कहते हैं) उस में सुखी दिखाई दी लेकिन थूक में खून का रंग बिल्कुल भी मालूम नहीं हुआ तो वुजू नहीं टूटता ।
मसअलह :- (12) मच्छर या खटमल के खून पी लेने से वुजू नहीं टूटता ।

वजू किन-किन चीजों से टूट जाता है
Mosquito (मच्छर)
वजू किन-किन चीजों से टूट जाता है
Bedbugs (खटमल)
मसअलह :- (13) अगर किसी के कान में दर्द होता है और पानी निकलता है तो यह पानी नजिस ( नापाक ) है । उसके निकलने से वुजू टूट जाएगा | जब पानी कान के सुराख़ में से निकल कर उस जगह खून आ जाए जिस का नहाते वक़्त धोना फ़र्ज़ है या आँखें दुखती या खटकती हैं तब भी पानी या आंसू बहने से वुज़ू टूट जाता है | लेकिन अगर आँखें न दुखें और न उस में कुछ खटक हो तो आंसू निकलने से वुज़ू नहीं टूटता |
मसअलह :- (14) अगर औरत की छाती से पानी निकलता है और दर्द भी होता है तो वह भी नापाक है , उससे वुजू जाता रहेगा ।
मसअलह :- (15) अगर कय ( मतली ) हुई और उसमें खाना या पानी या पित्त ( कड़वा पदार्थ ) निकला तो अगर मुंह भर के कय हुई तो वुजू टूट गया । अगर मुंह भर कय नहीं हुई तो वुजू नहीं टूटा । मुंह भरकर मतली होने का यह मतलब है कि पेट की गंदगी मुश्किल से मुंह में रुके । अगर मतली में निरा बल्गम निकला तो वुजू नहीं गया, चाहे वह कितना ही हो । अगर मतली में खून निकले और वह पतला हो और बहता हुआ हो तो वुजू टूट जाएगा । अगर जमा हुआ टुकड़ा गिरे और मुंह भर कर हो तो भी वुजू टूट जाएगा लेकिन अगर कम हो तो न टूटेगा ।
मसअलह :- (16) अगर थोड़ी थोड़ी मतली कई बार हो लेकिन कुल मिलाकर इतनी हो कि अगर एक बार होती तो मुंह भर जाता तो अगर एक ही मतली बराबर बाकी रही तो वुजू टूट गया । और अगर एक ही मतली बराबर नहीं रही तो वुजू नहीं टूटता ।
मसअलह :- (17) अगर किसी की लेटे लेटे आंख लग गई या किसी चीज़ से टेक लगाकर बैठे बैठे नींद आ गई, और गफलत हो गई कि अगर वह टेक न होती तो गिर पड़ता तो वुजू जाता रहा और अगर नमाज में बैठे बैठे या खड़े खड़े सो गया तो वुजू नहीं गया , अगर सज्दे में सो जाए तो वुजू टूट जाएगा
मसअलह :- (18) अगर कोई नमाज से बाहर बैठे - बैठे सोए और अपना चूतड़ एडी से दबा ले लेकिन दीवार या किसी चीज़ से टेक न लगाए तो वुजू नहीं टूटता ।
मसअलह :- (19) बैठे बैठे नींद का ऐसा झोंका आया कि गिर पड़ा तो अगर गिर कर उसी वक़्त आँख खुल गई तो वुज़ू नहीं गया | लेकिन गिरने के थोड़ी देर बाद आँख खुली तो वुज़ू जाता रहा । अगर बैठा बैठा झूमता रहा, गिरा नहीं, तब भी वुज़ू नहीं गया ।
मसअलह :- (20) अगर बेहोशी हो गई या जुनून ( पागलपन ) से अक्ल ( बुद्धि , मति ) जाती रही तो वुजू टूट गया , चाहे बेहोशी और जुनून थोड़ी ही देर रहे । ऐसे ही अगर तम्बाकू या कोई नशीली चीज़ खा ली और इतना नशा हो गया कि अच्छी तरह चला नहीं गया और कदम कदम पर इधर उधर भटका व डगमगाया तब भी वुजू जाता रहा ।
मसअलह :- (21) अगर नमाज़ में इतने ज़ोर से हंसी निकली कि खुद उसने और आस पास वालों ने भी सुन ली , उससे भी वुजू टूट गया और नमाज़ भी टूट गई लेकिन अगर ऐसा हो कि हँसी की आवाज़ खुद सुन ले , पास वाले सब न सुन सकें , मगर बहुत ही पास वाला कोई सुन ले तो नमाज़ टूट जाएगी वुजू नहीं टूटेगा । अगर हँसी में दांत खुले , आवाज़ न निकली तो न वुजू टूटा और न नमाज़ ही गई ।
मसअलह :- (22) हाथ लगाने या ख्याल करने से आगे की जगह ( लिंग ) से पानी आ जाए तो वुजू टूट जाता है । उस पानी को ' वदी ' कहते हैं ।
मसअलह :- (23) अगर बीमारी की वजह से आगे की तरफ से जो लेसदार पानी आता है , नापाक है तो उसके निकलने से वुजू टूट जाता है ।
मसअलह :- (24) पेशाब या ' वदी ' का कतरा सुराख़ से बाहर निकला , लेकिन अभी ऊपर वाली खाल में ही है , तब भी वुजू नहीं गया ।
मसअला :- (25) मर्द की पेशाब की जगह यानि ( लिंग ) से जब औरत की पेशाब की जगह मिल जाए और कोई कपड़ा आड़ में न हो तो वुज़ू टूट जाता है । ऐसे ही अगर दो औरतें आपस में अपनी शर्मगाहें मिलायें तब भी वुजू टूट जाता है ।
मसलह :- (26) मनी ( वीर्य ) अगर बगैर शहवत ( उत्तेजना ) खारिज हो तो वुजू टूट जाएगा । जैसे किसी ऊंची जगह से गिरे और मनी निकल पड़े ।
मसअलह :- (27) वुजू के बाद नाखुन कटाए या घाव के ऊपर की खाल नोच डाली तो वुजू नहीं टूटा ।
वजू किन-किन चीजों से टूट जाता है
Cutting nails

मसअलह :- (28) वुजू के बाद किसी का सतर यानि मर्द को नाफ़ से घुटनों तक जिस का छुपाना फ़र्ज़ है देख लिया, या अपना सतर खुल गया या नंगे होकर नहाया और नंगे ही नंगे वुजू किया तो उसका वुजू ठीक है , दोबारा वुजू करने की ज़रूरत नहीं
मसअलह :- (29) जिस चीज के निकलने से वुजू टूट जाता है , वह नापाक होती है और जिससे वुजू नहीं टूटता वह नापाक नहीं । तो अगर ज़रा सा खून निकला कि जख्म के मुंह से बहा नहीं या ज़रा सी मतली हुई , मुंह भरकर नहीं हुई तो यह खून और मतली नापाक नहीं है अगर यह कपड़े या बदन में लग जाए तो इसका धोना वाजिब नहीं लेकिन अगर मुंह भर कर मतली हुई या खून घाव से बह गया तो वह नापाक है । उसका धोना वाजिब है अगर इतनी मतली करके कटोरे या लोटे को मुंह लगा कर कुल्ली के लिए पानी लिया तो वह बर्तन नापाक हो जाएगा , इसलिए चुल्लू से पानी लेना चाहिए ।
मसअलह :- (30) छोटा लड़का जो दूध पीता है उसके लिए भी यह हुक्म है । अगर मुंह भरकर न हो तो वह नापाक नहीं हैं , मगर जब मुंह भरकर हो तो नापाक है । अगर औरत उसके धोए बगैर नमाज़ पढ़े तो नमाज़ नहीं होगी ।
मसअलह :- (31) अगर वुजू करना याद है , लेकिन वुजू टूटना अच्छी तरह याद नहीं तो वुजू बाकी समझा जाएगा । इससे नमाज़ ठीक है , लेकिन दोबारा वुजू कर लेना अच्छा है ।
मअलह :- (32) किसी को वुजू करने में शक हुआ है कि कोई हिस्सा धोया या नहीं तो वह हिस्सा फिर धो लेना चाहिए । अगर वुजू कर चुकने के बाद शक हुआ तो कुछ परवाह न करे, वुजू हो गया । लेकिन अगर यह यकीन हो जाए कि कोई चीज़ धुलने से रह गई तो वज़ू नहीं है, उसे करले ।
मसअलह :- (33) जनाज़े की नमाज़ और तिलावत ( कुरआन शरीफ पढ़ना) के सज्दे में कहकहा लगाकर हंसने से वुजू नहीं जाता - चाहे बालिग हो या नाबालिग ।
वजू किन-किन चीजों से टूट जाता है
Janaze ki namaz
वजू किन-किन चीजों से टूट जाता है
Tilawat e quran

मसअलह :- (34) बिना वुजू किए कुरआन मजीद का छूना ठीक नहीं है । हां अगर ऐसे कपड़े से छूए जो बदन से अलग है तो ठीक है । कुरते के दामन से जब कि उसे पहने हुए हो छूना ठीक नहीं । अगर कलाम मजीद खुला हुआ रखा है और उसे देख देख कर पढ़ा मगर हाथ न लगाया तो यह भी ठीक है । इसी तरह बगैर वुजू ऐसे तावीज़ और तश्तरी का छूना भी ठीक नहीं है , जिसमें कुरआन की आयतें लिखी हों ।

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Monday, 6 July 2020

July 06, 2020

वज़ू का तरीका इन हिंदी और वज़ू के मसाइल की जानकारी

वज़ू का बयान

wazu banane ka tarika in hindi
Wazu karne ka tarika in hidin

वज़ू करने वाले को चाहए कि वज़ू करते वक़्त किब्ला यानि पच्छिम की तरफ मुंह कर के किसी ऊंची जगह बैठे और और वज़ू शुरू करते वक़्त बिस्मिल्लाह कहे सब से पहले तीन दफा पन्हचों तक हाथ धोए फिर तीन दफा कुल्ली करे और मिस्वाक यानि (दातौन) करे
wazu banane ka tarika in hindi
Miswak

अगर मिस्वाक न होतो ऊँगली से अपने दाँत साफ़ करले और अगर रोज़ादार होतो गरारह न करे, फिर तीन बार नाक में पानी डाले और बाएं हाथ से नाक साफ़ करे- लेकिन जिस का रोज़ा हो वह जितनी दूर तक नर्म गोश्त है उस से ऊपर पानी न ले जाए, फिर तीन दफा मुंह धोए, सर के बालों से लेकर थोड़ी के नीचे तक और इस कान की लौ से उस कान की लौ तक सब जगह पानी बाह जाए, फिर तीन बार दाहना हाथ कहनी समेत धोए, फिर बायां हाथ कहनी समेत तीन दफा धोए और एक हाथ की उँगलियों को दुसरे हाथ की उँगलियों में डाल कर खिलाल करे, और अंघूठी छल्ला वग़ैरा अदि जो कुछ हाथ में पहने हो हिलाले, फिर एक मर्तबा सारे सर का मसह करे, फिर कान का मसह करे, कान के अंदर की तरफ कलमा की उंगली से और कान की ऊपर की तरफ का अंगूठों से मसह करे लेकिन गले का मसह न करे- कान के मसह के लिए नया पानी लेनी की ज़रुरत नहीं है- सर के मसह से जो बचा पानी जो हाथ में लगा है वही काफी है और तीन बार दाहना पाँव टखने समेत धोए फिर बायां पाँव टखने समेत तीन दफा धोए, और बाएं हाथ के छुंगलियां से पैर की उँगलियों का खिलाल करे, पैर की दाहनी छुंगलियां से शुरू करे और बाएं छुंगिलियां पर खत्म करे-


यह वज़ू करने का मसनून यानि सुन्नत  तरीका है- 
लेकिन इस में कुछ चीज़ें फ़र्ज़ हैं, कुछ सुन्नत और कुछ मुस्तहब है-
मसअलह:- (1) वज़ू में सिर्फ चार चीज़ें फ़र्ज़ हैं-
एक मर्तबा सारा मुंह धोना, एक दफा कहनियों समेत दोनों हाथ धोना, एक बार चौथाई सर का मसह करना, एक एक बार टखनों समेत दोनों पाँव धोना, बस फ़र्ज़ इतना ही है- इस में से अगर एक चीज़ भी छूट जाएगी या कोई बाल बराबर भी सूखी रह जाएगी तो वज़ू न होगा-
wazu banane ka tarika in hindi

wazu banane ka tarika in hindi
Masah karne ka tarika

मसअलह :- (2) पहले पन्हचों तक दोनों हाथ धोना, बिस्मिल्लाह कहना, कुल्ली करना, नाक में पानी डालना, मिस्वाक यानि (दातौन) करना, सारे सर का मसह करना, हर अज़्व यानि (वज़ू के शरीर के हिस्सा) को तीन तीन मर्तबा धोना, कानों का मसह करना, हाथ और पैर की उँगलियों का खिलाल करना, यह सब बातें सुन्नत हैं और इन के सिवा और जो बातें हैं वह सब मुस्तहब हैं-
मसअलह :- (3) जब यह चार अज़्व (वज़ू के शरीर का हिस्सा) जिन का धोना फ़र्ज़ है धुल जाएंगे तो वज़ू हो जाएगा- चाहे वज़ू का इरादा हो या न हो जैसे कोई नहाते वक़्त सारे जिस्म पर पानी बहाए और वज़ू न करे या होज़ में गिर पड़े या पानी बरस्ते में बाहर खड़ा हो जाए और वज़ू के यह आज़ा यानि वज़ू के हिस्सा धुल जाएं तो वज़ू हो जाएगा लेकिन सवाब वज़ू का न मिलेगा-
मसअलह :- (4) सुन्नत यही है कि इसी तरह वज़ू करे जिस तरह हम ने ऊपर बयान किया है और अगर कोई उलटा वज़ू करले पहले पाँव धो डाले फिर मसह करे फिर दोनों हाथ धुए फिर मुंह धो डाले या और किसी तरह उलट पलट करके वज़ू करे तो भी वज़ू हो जाता है लेकिन सुन्नत के तरीका से वज़ू नहीं होता और गुनाह का खौफ है-
मसअलह :- (5) इसी तरह अगर बायाँ हाथ या बायाँ पाँव पहले धोया तब भी वज़ू हो गया लेकिन मुस्तहब के खिलाफ है-
मसअलह :- (6) एक अज़्व यानि एक वज़ू के हिस्सा को धो कर दूसरे हिस्सा को धोने में इतनी देर न लगाए कि पहला अज़्व यानि वज़ू के हिस्सा सूख जाए, बल्कि इस के सूखने से पहले पहले दूसरा हिस्सा धो डाले-
मसअलह :- (7) हर वज़ू के हिस्सा धोते वक़्त यह भी सुन्नत है कि इस पर हाथ फेरले ताकि कोई जगह सूखा न रहे-
मसअलह :- (8) मुंह धोने के बाद दाढ़ी का दो तीन बार खिलाल करे-
मसअलह :- (9) जो जगह रुखसार यानि गाल और कान के बीच है उस का धोना फ़र्ज़ है-
मसअलह :- (10) थोड़ी का धोना फ़र्ज़ है बशर्तेकि दाढ़ी के बाल उस पर न हों या हों तो इस क़दर कम हों कि खाल नज़र आए-
मसअलह :- (11) होंठ का जो हिस्सा कि होंठ बंद होने के बाद दिखाई देता है उस का धोना फ़र्ज़ है-
मसअलह :- (12) दाढ़ी या मोंछ या भवें अगर इस क़दर घनी हों कि खाल नज़र न आए तो इस खाल को धोना जो छुपी हुई है फ़र्ज़ नहीं है बल्कि बालों पर से पानी बहा देना काफी है-
मसअलह :- (13) भवें या दाढ़ी या मोंछ इस क़दर घनी हों कि इस के नीचे की जिल्द छुप जाए और नज़र न आए तो ऐसी सूरत में इतने बालों का धोना वाजिब है जो हद चेहरे के अंदर हों, बाक़ी जो बाल हद मज़कूरह  से आगे बढ़ गए हों उन का धोना वाजिब नहीं-
मसअलह :- (14) वक़्त से पहले वज़ू करना मुस्तहब है-
मसअलह :- (15) जब तक कोई मजबूरी न हो खुद अपने हाथ से वज़ू करे किसी और से पानी न डलवाए और वज़ू करेने में दुनिया की कोई बात चीत न करे और पानी कितना ही फरागत का क्यों न हो चाहे दरया के किनारे पर हो लेकिन पानी तब भी ज़रुरत से ज़ियादा खर्च न करे और न पानी में बहुत कमी करे कि अच्छी तरह धोने में दिक़्क़त हो- न किसी अज़्व को यानि वज़ू के हिस्सा को तीन मर्तबा से ज़्यादा धोए और मुंह धोते वक़्त पानी का छींटा ज़ोर से मुंह पर न मारे न फुंकार मार कर छींटे उड़ाए और न अपने मुंह और आँखों को बहुत ज़ोर से बंद करे कि यह सब बातें मकरूह और मना हैं-
मसअलह :- (16) किसी औरत की अंगूठी, छल्ले, चूड़ी, कंगन, नाक की कील वग़ैरा अदि अगर ढीली हों कि बगैर हिलाए भी उन के नीचे पानी पहुँच जाए तब भी उन का हिलाना मुस्तहब है और अगर ऐसे तंग हों कि बगैर हिलाए पानी न पहुँचने का गुमान हो तो उन को हिला कर अच्छी तरह पानी पहुंचा देना ज़रूरी और वाजिब है-
wazu banane ka tarika in hindi
Ablution ring

मसअलह :- (17) अगर किसी के नाखून के ऊपर आटा लग कर सूख गया और उस के नीचे पानी नहीं पहुंचा तो वज़ू नहीं हुआ जब याद आए तो छुड़ा कर पानी डाल ले और अगर कोई नमाज़ पढ़ली तो लौटाए-
मसअलह :- (18) जब वज़ू कर चुके तो सूरह (इन्ना अंज़लना) और यह दुआ पढ़े-
अल्लाहुम्मजअलनी मिनत्त्ववाबी न वजअलनी मिनल मु त तहहिरीन वजअलनी मिन-इबादिकस्सालिहीन वजअलनी मिनल्लज़ी-न  ला खौफुन अलैहिम वलाहुम यहज़नून
तर्जमा : ए अल्लाह करदे मुझ को तौबा करने वालों में से और करदे मुझ को गुनाहों से पाक होने वाले लोगों में से और करदे मुझ को नेक बन्दों में से और करदे मुझ को उन लोगों में से जिन को दोनों जहां में कुछ खौफ डर नहीं-
मसअलह :- (19) जब वज़ू कर चुके तो बेहतर है कि दो रकात नमाज़ ए तहिय्यतुल वज़ू पढ़े- हदीस शरीफ में इस का बड़ा सवाब आया है-
मसअलह :- (20) अगर एक नमाज़ के लिए वज़ू किया, फिर दूसरी नमाज़ का वक़्त आ गया और अभी वज़ू टूटा नहीं तो इसी वज़ू से दूसरी नमाज़ पढ़ना जाएज़ है और अगर ताज़ा करे तो बहुत बड़ा सवाब मिलता है-
मसअलह :- (21) जब एक दफा वज़ू कर लिया औए अभी वह टूटा नहीं तो जब तक इस वज़ू से कोई इबादत न करले उस वक़्त तक दूसरा वज़ू करना मकरूह और मना है-
मसअलह :- (22) किसी के हाथ पाँव फट गए और इस में मूम रोगन या और  कोई दवा भरली और इस के निकालने से ज़रर यानि नुकसान होगा तो इस को बिला निकाले ऊपर ही ऊपर पानी बहा दिया तो वज़ू दुरुस्त है-
wazu banane ka tarika in hindi
The foot broke

मसअलह :- (23) वज़ू करते वक़्त एड़ी पर या किसी और जगह पानी नहीं पहुंचा, और जब पूरा वज़ू हो चूका तब मालूम हुआ कि फलां जगह सूखी है तो वहाँ पर सिर्फ हाथ फेर लेना काफी नहीं है बल्कि पानी बहाना ज़रूरी है-
मसअलह :- (24) अगर हाथ पाँव वग़ैरा अदि में कोई फोड़ा है या और कोई ऐसी बीमारी है कि इस पर पानी डालने से नुकसान होता है तो पानी न डाले, वज़ू करते वक़्त सिर्फ भीगा हुआ हाथ फेरले इस को मसह कहते हैं और अगर यह भी नुक़्सान्दह होतो हाथ भी न फेरे इतनी जगह छोड़ दे-
मसअलह :- (25) अगर ज़ख़्म पर पट्टी बंधी और पट्टी खोल कर ज़ख़्म पर मसह करने से नुकसान हो या पट्टी खोलने बाँधने में बड़ी दिक़्क़त और तकलीफ हो तो पट्टी के ऊपर मसह कर लेना दुरुस्त है-
मसअलह :- (26) मस्जिद के फर्श यानि मस्जिद के वह हिस्सा जहाँ नमाज़ पढ़ी जाती हो वहाँ पर वज़ू करना दुरुस्त नहीं-

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Monday, 4 May 2020

May 04, 2020

रोज़ा का कफ़्फ़ारे का बयान roza ka kaffare ka bayan in hindi

रोज़ा का कफ़्फ़ारे का बयान

roza ka kaffare ka bayan in hindi
roza ka kaffara

रमज़ान शरीफ के रोज़े तोड़ डालने का कफ़्फ़ारा यह है कि दो महीने बराबर लगातार रोज़े रखे थोड़े थोड़े कर के रोज़े रखने दुरुस्त नहीं अगर किसी वजह से बीच में दो एक रोज़े नहीं रखे तो अब फिर से दो महीने के रोज़े रखे हाँ जितने रोज़े हैज़ यानि माहवारी जो औरतों को हर महीने खून आता है उस की वजह से छूट गए वह माफ़ है इन के छूट जाने से कफ़्फ़ारे में कुछ नुकसान नहीं आया लेकिन पाक होने के बाद तुरंत फिर रोज़े रखने शुरू करे और साठ(60) रोज़े पूरे कर ले-
roza ka kaffare ka bayan in hindi

नफास जो बच्चा पैदा होने बाद जो खून आता है उस की वजह से बीच में रोज़े छूट गए पूरे रोज़े लगातार नहीं रख सकी तो भी कफ़्फ़ारा सही नहीं हुआ सब रोज़े फिर से रखे-
अगर दुःख बिमारी की वजह से बीच में कफ़्फ़ारे के कुछ रोज़े छूट गए तब भी दंदुरुस्त होने के बाद फिर से रोज़े रखने शुरू करे-
अगर बीच में रमज़ान का महीना आ गया तब भी कफ़्फ़ारा सही नहीं हुआ-
अगर किसी को रोज़ा रखने की ताक़त न हो तो साठ(60) मिस्कीनों को सुबह शाम पेट भर के खाना खिला दे
roza ka kaffare ka bayan in hindi
जितना उनके पेट में समाए खूब तन कर खिलाएं यानि बिल्कुल भूख न रहे-
इन मिस्कीनों में अगर कुछ बिल्कुल छोटे बच्चे हों तो जाएज़ नहीं इन बच्चों के बदले और मिस्केनों को फिर खिलाए-
roza ka kaffare ka bayan
Poor children

अगर गेहूँ की रोटी हो तो रूखी रोटी खिलाना भी दुरुस्त है और अगर जौ बाजरा जवार वग़ैरा की की रोटी हो तो उस के साथ कुछ दाल वग़ैरा (अदि) देना चाहए जिस के साथ रोटी खालें-
roza ka kaffare ka bayan

अगर खाना न खिलाए बल्कि साठ(60) मिस्कीनों को कच्चा अनाज देदे तो भी जाएज़ है हर एक मिस्कीन को इतना इतना दे जितना सदक़ा ए फ़ित्र दिया जाता है- और सदक़ा ए फ़ित्र का बयान इंशाअल्लाह तआला आगे आएगा-
अगर इतने अनाज के कीमत देदे तो भी जाएज़ है-
अगर किसी और से कह दिया कि तुम मेरी तरफ से कफ़्फ़ारा अदा कर दो और साठ(60) मिस्कीनों को खाना खिला दो और उस ने उस की तरफ से खाना खिला दिया या कच्चा अनाज दे दिया तब भी कफ़्फ़ारा अदा हो गया और अगर उस के कहे बिना किसी ने उस की तरफ से दे दिया तो कफ़्फ़ारा सही नहीं हुआ-
अगर एक ही मिस्कीन को साठ(60) दिन तक सुबह शाम खाना खिला दिया या साठ(60) दिन तक कच्चा अनाज या कीमत देता रहा तब भी कफ़्फ़ारा सही हो गया-
अगर साठ(60) दिन तक लगातार खाना नहीं खिलाया बल्कि बीच में कुछ दिन छूट गया तो कुछ हर्ज नहीं यह भी दुरुस्त है-
अगर साठ(60) दिन का अनाज हिसाब कर के एक फ़क़ीर को एक ही दिन दे दिया तो दुरुस्त नहीं-
roza ka kaffare ka bayan in hindi
इसी तरह एक ही फ़क़ीर को एक ही दिन अगर साठ(60) बार कर के दे दिया तब भी एक ही दिन का अदा हुआ एक कम साठ(60) मिस्कीनों को फिर देना चाहए इसी तरह कीमत देने का हुक्म है यानि एक दिन में एक मिस्कीन को एक रोज़े के बदले से ज़्यादा देना दुरुस्त नहीं-
अगर किसी को सदक़ा ए फ़ित्र की मिक़्दार से कम दिया तो कफ़्फ़ारा सही नहीं हुआ-
अगर एक ही रमज़ान के दो या तीन रोज़े तोड़ डाले तो एक ही कफ़्फ़ारा वाजिब है- हाँ अगर यह दोनों रोज़े एक रमज़ान के न हों तो अलग अलग कफ़्फ़ारा देना पड़ेगा-
(बिहिश्ती ज़ेवर)

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Thursday, 30 April 2020

April 30, 2020

क़ज़ा रोज़े का बयान qaza roza ka bayan

क़ज़ा रोज़े का बयान

qaza roza ka bayan in hindi क़ज़ा रोज़े का बयान हिन्दी में
Qaza roze ka bayan

जो रोज़े किसी वजह से क़ज़ा हो गए हों रमजान के बाद जहाँ तक जल्दी हो सके उनकी क़ज़ा रख ले देर न करे- बे वजह क़ज़ा रखने में देर लगाना गुनाह है-
रोज़े की क़ज़ा में दिन तारीख मुक़र्रर कर के क़ज़ा की नियत करना कि फलां तारीख के रोज़े की क़ज़ा रखता हूँ यह ज़रूरी नहीं है बल्कि जितने रोज़े क़ज़ा हों उतने ही रोज़े रख लेना चाहए- हाँ अगर दो रमज़ान के कुछ कुछ रोज़े क़ज़ा हो गए इस लिए दोनों साल के रोज़ों की क़ज़ा रखना है तो साल का मुक़र्रर करना ज़रूरी है यानि इस तरह नियत करना की फलां साल के रोज़ों की क़ज़ा रखता हूँ-
क़ज़ा रोज़े में रात से नियत करना ज़रूरी है अगर सुबह हो जाने के बाद नियत की तो क़ज़ा सही नहीं हुई बल्कि वह रोज़ा नफल हो गया क़ज़ा का रोज़ा फिर से रखे-
qaza roza ka bayan in hindi क़ज़ा रोज़े का बयान हिन्दी में
Fast sehri

कफ़्फ़ारे के रोज़े का भी यही हुक्म है कि रात से नियत करना चाहए- अगर सुबह होने के बाद नियत की तो कफ़्फ़ारा का रोज़ा सही नहीं हुआ-
जितने रोज़े क़ज़ा हो गए हैं चाहे सब को एक दम से रख ले चाहे थोड़े थोड़े कर के दोनों बातें दुरुस्त हैं-
अगर रमजान के रोज़े अभी क़ज़ा नहीं रखे और दूसरा रमजान आ गया तो खैर अब रमजान के अदा रोज़े रखे और ईद के बाद क़ज़ा रखे लेकिन इतनी देर करना बुरी बात है-
रमजान के महीने में दिन को बेहोश हो गया और एक दिन से ज़ियादा बेहोश रहा तो बेहोश होने के दिन के इलवाह जितने दिन बेहोश रहा इतने दिनों की क़ज़ा रखे- जिस दिन बेहोश हुआ उस एक दिन की क़ज़ा वाजिब नहीं है क्योंकि उस दिन का रोज़ा ब्वजह से नियत के दुरुस्त हो गया- हाँ अगर उस दिन रोज़ा से न था या उस दिन हलक़ में कोई दावा डाली गई और वह हलक़ से उतर गई तो उस दिन की क़ज़ा भी वाजिब है-
qaza roza ka bayan in hindi क़ज़ा रोज़े का बयान
Unconscious man

और अगर रात को बेहोश हुआ हो तब भी जिस रात को बेहोश हुआ उस एक दिन की क़ज़ा वाजिब नहीं है और जितने दिन बेहोश रहा सब की क़ज़ा वाजिब है हाँ अगर उस रात को सुबह का रोज़ा रखने की नियत न थी या सुबह को कोई दावा हलक़ में डाली गई तो उस दिन का भी क़ज़ा रखे-
अगर सारे रमजान भर बेहोश रहे तब भी क़ज़ा रखना चाहए यह न समझे कि सब रोज़े माफ़ हो गए- हाँ अगर जुनून यानि पागल पन हो गया और पुरे रमजान भर दीवाना रहा तो इस रमजान के किसी रोज़े की क़ज़ा वाजिब नहीं और अगर रमजान शरीफ के महीने में किसी दिन जुनून जाता रहा यानि अच्छा हो गया और अक्ल ठिकाने हो गई तो अब से रोज़े रखने शुरू करे और जितने रोज़े जुनून में गए उन की भी क़ज़ा रखे-   (बिहिश्ती ज़ेवर)

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Thursday, 16 April 2020

April 16, 2020

औरतों की नमाज़ पढ़ने का सही तरीक़ा auraton ki namaz padhne ka sahi tarika in hindi

औरतों की नमाज़ पढ़ने का सही तरीक़ा

auraton ki namaz औरतों की नमाज़ पढ़ने का सही तरीक़ा
Auraton ki namaz

मसअलह :-1 नमाज़ की निय्यत कर के अल्लाहु अकबर कहे और अल्लाहु अकबर कहते वक़्त अपने दोनों हाथ कंधे तक उठाए लेकिन हाथों को दुपट्टा से बाहर न निकाले फिर सीने पर हाथ बाँध ले और दाहने हाथ की हथेली को बाएं हाथ की हथेली की पुश्त यानि कलाई पर रखे और सना पढ़े...
सुबहा न कल्लाहुम् मः व बिहमदि कः व तबा रकसमु कः व तआला जद्दु कः व ला इला हः गैरुक ?
سُبْحَانَكَ اللّٰهُمَّ وَبِحَمْدِكَ وَتَبَارَكَ اسْمُكَ وَتَعَالٰى جَدُّكَ وَلَااِلٰهَ غَيْرُكَ؟ 
फिर अऊज़ुबिल्लाह और बिस्मिल्लाह पढ़ कर सूरह फातिहा यानि अल्हमदुलिल्लाहि रब्बिल आ लमीन से ले कर वज़्ज़ालीन तक. उस के बाद आमीन कहे फिर बिस्मिल्लाह पढ़ कर कोई सूरह पढ़े- फिर अल्लाहु अकबर कह के रुकू में जाए और तीन या पाँच या सात मर्तबा सुबहा न रब्बियल अज़ीम (سُبْحَانَ رَبٌِيَ الْعَظِيْمْ) कहे- और रुकू में दोनों हाथ की उंगलियाँ मिला कर घुटनों पर रख दे और दोनों बाज़ू को पहलू यानि (बग़ल) से खूब मिलाए और दोनों पैर के टखने बिल्कुल मिला दे यानि दोनों पैर बिल्कुल सटा दे फिर समिअल्लाहु लिमन हमि दह (سَمِعَ اللٌٰهُ لِمَنْ حَمِدَهْ) कहती हुई सर को उठाए- जब खूब सीधी खड़ी हो जाए तो फिर अल्लाहु अकबर कहती हुई सजदे में जाए- ज़मीन पर पहले घुटने रखे- फिर कानों के बराबर ज़मीन पर हाथ रखे और उंगलियाँ आपस में खूब मिलाए फिर दोनों हाथ के बीच में माथा रखे और सजदे के वक़्त माथा और नाक दोनों ज़मीन पर रखदे और हाथ और पाओं की उंगलियाँ किब्ला यानि पच्छिम की तरफ रखे मगर पाओं खड़े न करे मर्द की तरह, बल्कि दोनों पैर दाहनी तरफ को निकाल दे और खूब सिमट कर और दब कर सजदा करे पेट दोनों रानों से और बाहें दोनों पहलू से मिला लेवे- और दोनों बांहे ज़मीन पर रख दे और सजदा में कम से कम तीन दफ़ा या ज़्यादा से ज़्यादा सात मर्तबा सुब्हा न रब्बियल अअला (سُبْحَانَ رَبٌِيَ الْاَعْلٰى) कहे एक रकात पूरी हो गई-
इन तस्वीर को देख कर खूब समझ लें 
auraton ki namaz padhne ka tarika in hindi औरतों की नमाज़ पढ़ने का सही तरीक़ा
Auraton ki namaz

फिर अल्लाहु अकबर कहती हुई खड़ी हो जाए और ज़मीन पर हाथ टेक कर के न उठे फिर बिसमिल्लाह कह कर अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन से व लज़्ज़ाल्लीन यानि सूरह फातिहा पढ़ कर कोई और सूरह पढ़ के दूसरी रकात इसी तरह पूरी करे, जैसे पहली रकात बताई गई- जब दूसरी रकात में दूसरा सजदा कर चुके तो त्शहुद के लिए बाएं कमर पर बैठे और अपने दोनों पाओं दाहनी तरफ निकाल दे और दोनों हाथ अपनी रानों पर रखले और उंगलियाँ खूब मिला कर यानि खूब सटा कर रखे- फिर त्शहुद यानि अत्तहिय्यात पढ़े ....
अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्स ल वातु वत्ताय्यिबातु अस्सलामु अलै कः अय्युहं नबिय्यु व रह्मतुल्लाहि व ब रकातुह अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्ला हिस्सालिहीन 
अश्हदु अल्ला इला हः इल्लल्लाह व अश्हदु अन् नः मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुह
اَلتَّحِيَّاتُ لِلٌٰهِ وَالصَّلَوٰةُ وَالطَّيِّبَاتُ اَلسَّلَامُ عَلَيْكَ اَيُّهَاانَّبِيُّ وَرَحْمَةُاللّٰهِ وَبَرَكَاتُهٗ اَلسَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلٰى عِبَادِاللّٰهِ الصَّالِحِيْنْ
اَشْهَدُ اَن لَّااِلٰهَ اِلَّااللّٰهُ واَشْهَدُ اَنَّ مُحَمْدًا عَبْدُهٗ وَرَسُوْلُهٗ
और जब अश्हदु अल्ला इला ह पर पहुँचे तो बीच की ऊँगली और अंगूठे से गोल कर के शहादत की उँगली को उठाए और इल्लल्लाह कहते वक़्त झुका दे मगर अक़्द व हल्क़ा यानि (बीच की उँगली और अंगूठे से गोल कर के) हय्यत को आख़री नमाज़ तक बाक़ी रखे- और चार रकात पढ़ना होतो इस से ज़्यादा और कुछ न पढ़े बल्कि फ़ौरन उठ खड़ी हो और और दो रकातें और पढ़ ले और फ़र्ज़ नमाज़ में पिछली दो रकातों में सूरह फातिहा के साथ और कोई सूरह न मिलाए- जब चौथी रकात पर बैठे तो फिर अत्तहिय्यात पढ़ के यह दरूद शरीफ पढ़े ....
अल्लाहुम् मः सल्लि अला मुहम्मदिंव् वअला आलि मुहम्म्द कमा सल्लै तः अला इब्राही मः व अला आलि इब्राही मः इं न कः  हमीदुम् मजीद
अल्लाहुम् मः बारिक अला मुहम्मदिंव् वअला आलि मुहम्मद कमा बारक तः अला इब्राही मः व अला आलि इब्राही मः इं न कः हमीदुम् मजीद ?
اَللّٰهُمَّ صَلِّ عَلٰى مُحَمَّدٍ وَّعَلٰى اٰلِ مُحَمَّدْ كَمَاصَلَّيْتَ عَلٰى اِبْرَاهِيْمَ وَعَلٰى اٰلِ اِبْرَاهِيْمَ اِنَّكَ حَمِيْدٌ مَّجِيْدْ
اَللّٰهُمَّ بَارِكْ عَلٰى مُحَمَّدٍ وَّعَلٰى اٰلِ مُحَمَّدْ كَمَا بَارَكْتَ عَلٰى اِبْرَاهِيْمَ وَعَلٰى اٰلِ اِبْرَاهِيْمَ اِنَّكَ حَمِيْدٌ مَّجِيْدْ ؟
फिर दुआ ए मासूरह पढ़े ....
अल्लाहुम् म इन्नी ज़लम्तु नफ़्सी जुल्मन कसीरंव् वला यगफिरुज़् ज़ुनू ब: इल्ला अंत: फग फिरली मगफिरतम् मिन इंदि क: वर्हमनी इं नक्: अंतल गफूरुर रहीम
اَللّٰهُمَّ اِنِّيْ ظَلَمْتُ نَفْسِي ظُلْمًا كَثِيْرًا وَّلَايَغْفِرُ الذُّنُوْبَ اِلَّا اَنْتَ فَااغْفِرْلِيْ مَغْفِرَةً مِّنْ عِنْدِكَ وَارْحَمْنِيْ اِنَّكَ اَنْتَ الْغَفُوْرُ الرَّحِيْمْ
या कोई और दुआ पढ़े जो हदीस या कुर्आन मजीद में आई हो- फिर अपनी दाहनी तरफ सलाम फेरे और कहे अस्सलामु अलैकुम व रह्मतुल्लाह फिर यही कह कर बाएं तरफ सलाम फेरे और सलाम करते वक़्त फरिश्तों पर सलाम करने की निय्यत (इरादा) करे- यह नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा है-
लेकिन इनमें जो फ़राइज़ हैं उन में से अगर एक बात भी छूट जाएँ तो नमाज़ नहीं होगी चाहे जान कर छोड़े चाहे भूले से दोनों का एक ही हुक्म है
नमाज़ में 7 चीज़ें शर्त हैं और 6 चीज़ें नमाज़ में फ़र्ज़ हैं-
यानि वह काम जिन के बिना नमाज़ नहीं होती-
इन तस्वीरों को देख कर नमाज़ के फ़राइज़ और शराएत याद कर लें-
auraton ki namaz padhne ka tarika in hindi औरतों की नमाज़ पढ़ने का सही तरीक़ा
auraton ki namaz padhne ka tarika in hindi औरतों की नमाज़ पढ़ने का सही तरीक़ा

और कुछ चीज़ें वाजिब हैं इस में से अगर कोई चीज़ क़सदं (जान) कर छोड़ दे तो नमाज़ निकम्मी और खराब हो जाती है और फिर से नमाज़ पढ़नी पड़ती है- अगर कोई फिर से न पढ़े तो खेर तब भी फ़र्ज़ अदा हो जाता है लेकिन बहुत गुनाह होता है- और अगर भूले से छूट जाए तो सजदा सह्व कर लेने से नमाज़ हो जाएगी-
सजदा सह्व करने का तरीक़ा यह है कि नमाज़ के आखरी रकात में अत्तहिय्यात पढ़ने के बाद दो दफा सजदा कर के बैठ जाए, और बैठ कर फिर अत्तहिय्यात दरूद शरीफ और दुआ ए मासूरह पढ़ कर दोनों तरफ सलाम फेरे और नमाज़ को पूरी करे-
नमाज़ में 14 चीज़ें वाजिब हैं, 
इन तस्वीरों को देख कर याद करलें-
औरतों की नमाज़ पढ़ने का सही तरीक़ा auraton ki namaz padhne ka tarika in hindi
auraton ki namaz padhne ka tarika in hindi औरतों की नमाज़ पढ़ने का सही तरीक़ा
auraton ki namaz padhne ka tarika in hindi औरतों की नमाज़ पढ़ने का सही तरीक़ा

और कुछ चीज़ें सुन्नत और कुछ चीज़ें मुस्तहब हैं- जो चीज़ें सुन्नत या मुस्तहब हैं अगर छूट जाए तो सजदा सह्व करने की भी ज़रूरत नहीं नमाज़ अदा हो जाएगी, लेकिन सुन्नत और मुस्तहब को अदा कर लेने से बहुत सवाब मिलता है-

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Tuesday, 7 April 2020

April 07, 2020

शब ए बरात की हक़ीक़त इबादत या बिदअत हिंदी में

शब ए बरात का बयान

Shab e barat ki haqiqat ibadat ya bidat in hindi
Shab e Barat

शबे बरात की इतनी हक़ीक़त है कि इस महीने के पंद्रहवीं रात और पंद्रहवीं दिन इस महीने की बहुत बुजुर्गी और बरकत का है- हमारे पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) इस रात को जागने की और दिन में रोज़ा रखने की रोग़बत दिलाई है - और इस रात में हमारे पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मदीना के कब्रिस्तान में तशरीफ ले जा कर मुर्दों के लिए बख़शिश की दुआ मांगी है- यदि इस तारीख में मुर्दों को कुछ बख्श दिया करे, चाहे कुरान शरीफ पढ़ कर  चाहे खाना खिला कर,  चाहे नकदे पैसा किसी गरीब को दे कर के, चाहे वैसे ही दुआ बखशिश की कर दे, तो यह तरीका सुन्नत के मुवाफिक है - इस से ज़्यादा जितने बखेड़े लोग कर रहे हैं इस में हलवे की क़ैद लगा रखी है, और इस तरीका से फातिहा दिलाते हैं, और खूब पाबंदी से यह काम करते हैं, यह सब वाहियात हैं- जो शर्अ (इस्लामी कानून) में ज़रूरी ना हो उस को ज़रूरी समझना या हद से ज़्यादा पाबंद हो जाना बुरी बात है यही बिदअत है-
Shab e barat ki haqiqat ibadat ya bidat in hindi
Fireworks

और कुछ जाहिल लोग शबे बरात में आतिशबाजी करते हैं या शादी में अनार पटाखे या आतिशबाज़ी करने में कई  गुनाह हैं। ’पहली माल (धन) बर्बाद जाता है- कुरआन शरीफ में माल के फुज़ूल उड़ाने वालों को शैतान के भाई कहा है। और एक आयत में यह कहा गया है कि माल फुज़ूल उड़ाने वालों को अल्लाह तआला नहीं चाहते, यानी वे उन से बेज़ार नाराज़ हैं - दूसरे हाथ पैर जलने का ख़तरा या घर में आग लगने का डर, और अपनी जीवन या माल दौलत को ख़तरे में डालना, खुद शर्अ (इस्लामी कानून) में बुरा है - तीसरे लिखे हुए कागज़ को आतिशबाजी के काम में लाते हैं, ख़ुद हुरूफ (शब्द) भी अदब की चीज़ हैं , इस तरह के कामों में लाना मना है, बल्कि कुछ ऐसे कागजों पर कुरान की आयतें या हदीसें या पैगंबरों के नाम लिखे हुए होते हैं - बतलाओ तो सही उनके साथ बेअदबी कितना बड़ा वबाल (गुनाह) है - आप सब अपने बच्चों को इन कामों के लिए कभी पैसा ना दें या कोई अपने तरफ से करें तो उन को मना करें। ये सब बहुत बड़ा गुनाह की बातें हैं?

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Thursday, 26 March 2020

March 26, 2020

एक अंधे आशिक़ का किस्सा (कहानी)

एक अंधे आशिक़ का किस्सा

Interesting article in hindi
Muslim blind

एक अँधा आशिक़ लड़कों को पढ़ाता था, एक लड़के की माँ खुशामद में उस अंधे मुअल्लिम (पढ़ाने वाले) के पास अपने बच्चे के हाथ कभी कभी खाना वगैरा (आदि) भेज दिया करती थीं कभी सलाम कहला भेजती थीं अंधे ने समझा कि औरत मुझ से मोहब्बत करती है इस लिए इस को भी उस से मोहब्बत हो गई
Interesting article in hindi
Muslim women

एक रोज़ इस ने लड़के के हाथ उस की माँ के पास इज़हार ए इश्क़ के साथ मुलाक़ात के दरख़्वास्त का पयाम कहला भेजा, औरत पारस (नेक) थी उसे नागवार हुआ उस ने अपने शौहर से यह बात कही- इन दोनों में यह तय हो गया कि अंधे को उस का मज़ा चखाना चाहये- और उस की सूरत भी तजवीज़ करली करली गई- इस के बाद इस औरत ने हाफ़िज़ जी को लड़के के हाथ बुलवा भेजा हाफ़िज़ जी वक़्त ए महूद पर पहुँच गए इतने में बाहर से आवाज़ आई किवाड़ खिलो- हाफ़िज़ जी यह सुन कर घबरा गए औरत ने कहा घबराओ नहीं मैं अभी इंतिज़ाम कर देती हूँ- तुम यह दुपट्टा ओढ़ कर चक्की पीसने लागो हाफ़िज़ जी ऐसा ही किया इस ने जा कर किवाड़ खोल दिए शौहर अंदर आया, मिली भगत तो थी ही, पोछा यह कौन औरत है- कहा हमारी लौंडी है आटे की ज़रुरत थी इस लिए बे वक़्त चक्की पीस रही है- वह खामूश (चुप) रहा हाफ़िज़ जी ने क्यों चक्की पीसी थी आखिर थक गए और हाथ सुस्त (धीमा) चलने लगा, यह देख कर शौहर उठा, कहा मुर्दार सोती है पीसती क्यों नहीं यह कह कर चंद जूते मारे और आ कर अपनी जगह लेट रहा- हाफ़िज़ जी ने फिर पीसना शुरू किया थोड़ी देर पीसने के बाद फिर हाथ सुस्त चलने लगा उस औरत के शौहर ने फिर जो पहले लिया था गर्ज़ सुबह तक हाफ़िज़ जी से खूब चक्की पिसवाई और खूब जूते से मार पड़ी जब यह देखा कि हाफ़िज़ जी को काफी सजा मिल चुकी है तो शौहर वहाँ से टल गया, औरत ने कहा हाफ़िज़ जी अब मौक़ा है आप जल्दी से तशरीफ़ ले जाएं ऐसा न हो के वह ज़ालिम फिर आ जाए- हाफ़िज़ जी वहाँ से भागे और मस्जिद में दम लिया-
इस के बाद औरत को शरारत सूझी और उस ने लड़के के हाथ फिर सलाम कहला भेजा, हाफ़िज़ जी ने कहा, हाँ मैं समझ गया आटा नहीं रहा होगा-

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Tuesday, 24 March 2020

March 24, 2020

अल्लाह के क़हर से डरो

अल्लाह के क़हर से डरो

Interesting articles in Hindi
Died of pain

हकीमु अल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ अली थानवी (रहमतुल्लाहि अलैह) अपनी किताब में लिखें हैं कि जिस ज़माना में मेरे मामू मुंशी शौकत अली साहब मदरसा सरकारी में मुदर्रिस (उस्ताद) थे उस ज़माना में एक इन्सपैक्टर मदरसा में इम्तिहान के लिए आए, इम्तिहान में उन्हों ने लड़कों से अपने मंसब (काम) के खिलाफ सवाल किया कि बताओ कि खुदा की हस्ती की किया दलील है लड़के बेचारे किया जवाब देते वह खामूश रहे- मामू साहब ने फरमाया कि मुझ से पूछए मैं जवाब दूंगा______ इन्सपैक्टर साहब अपनी अफसरी के घमंड में थे, उन्हों ने नाख़ुशी के लहजा में फरमाया कि अच्छा आप ही जवाब दीजये, मामू साहब ने फरमाया कि खुदा की हस्ती की दलील यह है कि पहले तुम मादूम (फनां) थे और अब मौजूद हो और हर हादिस (नई चीज जो पहले से न हो) के लिए कोई इल्लत होनी चाहये वह इल्लत खुदा है. _______ उस ने जवाब दिया कि हम को तो हमारे माँ बाप ने पैदा किया न कि खुदा ने_____ मामू साहब ने फरमाया कि आप के माँ बाप को किस ने पैदा किया,______ उस ने कहा, उन के माँ बाप ने, मामू साहब ने फरमाया दो हाल (वर्तमानकाल) से खाली नहीं या यूँही सिलसिला चला जावेगा या कहीं जाकर ख़तम होगा, पहली सूरत में तसलसुल (सिलसिला) लाज़िम आएगा जो कि महाल है दूसरी सूरतें खुदा का वजूद मानना पड़ेगा उस इससे कुछ जवाब न आया और उस ने कहा आप तो मंतिक की बातें करते हैं गर्ज़ कहने लगा कि हम इन मंतिकी बातों को नहीं जानते हम तो सीधी बात जानते हैं और वह ये कि अगर खुदा है तो आप अपने खुदा से कहए कि हमारी आँख दुरुस्त (सही) करदे यह इन्सपैक्टर काना था, मामू साहब निहायत ज़रीफ़ (ख़ुश मिजाज़) थे उन्हों ने कहा बहुत बेहतर है मैं अभी कहता हूँ यह कह कर उन्हों ने आँखें बंद कर के आसमान की तरफ मुंह किया और थोड़ी देर बाद उन्हों ने इन्सपैक्टर साहब से कहा मैं ने अर्ज़ किया था मगर वहाँ से यह जवाब मिला कि हम ने उस को दो आँखें अता की थीं उस ने हमारी नेमत की नाशुक्री की और कहा कि हमारे माँ बाप ने पैदा किया है हमें इस पर गुस्सा आया हम ने उस की एक आँख फोड़ दी अब उस से कहो कि तू इस आँख को अपने उन्हें माँ बाप से बनवाओ जिन्हों ने तुझे पैदा किया है- इस जवाब पर उस को बहुत गुस्सा आया उस का और तो कुछ बस न चला मगर मुआयना खराब लिख गया इस गुस्ताखी का यह नतीजा हुआ कि थोड़े दिन के अंदर दर्द उठा और हलाक हो गया-
फायदा याद रखो अल्लाह तआला का क़हर दो तरह का होता है कभी तो सूरतन (देखने वाला) भी क़हर होता है और कभी क़हर बसूरत लुत्फ़ होता है यह क़हर, पहली क़हर से ज़्यादा खतरनाक होता है-


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