Monday, 4 May 2020

रोज़ा का कफ़्फ़ारे का बयान roza ka kaffare ka bayan in hindi

रोज़ा का कफ़्फ़ारे का बयान

roza ka kaffare ka bayan in hindi
roza ka kaffara

रमज़ान शरीफ के रोज़े तोड़ डालने का कफ़्फ़ारा यह है कि दो महीने बराबर लगातार रोज़े रखे थोड़े थोड़े कर के रोज़े रखने दुरुस्त नहीं अगर किसी वजह से बीच में दो एक रोज़े नहीं रखे तो अब फिर से दो महीने के रोज़े रखे हाँ जितने रोज़े हैज़ यानि माहवारी जो औरतों को हर महीने खून आता है उस की वजह से छूट गए वह माफ़ है इन के छूट जाने से कफ़्फ़ारे में कुछ नुकसान नहीं आया लेकिन पाक होने के बाद तुरंत फिर रोज़े रखने शुरू करे और साठ(60) रोज़े पूरे कर ले-
roza ka kaffare ka bayan in hindi

नफास जो बच्चा पैदा होने बाद जो खून आता है उस की वजह से बीच में रोज़े छूट गए पूरे रोज़े लगातार नहीं रख सकी तो भी कफ़्फ़ारा सही नहीं हुआ सब रोज़े फिर से रखे-
अगर दुःख बिमारी की वजह से बीच में कफ़्फ़ारे के कुछ रोज़े छूट गए तब भी दंदुरुस्त होने के बाद फिर से रोज़े रखने शुरू करे-
अगर बीच में रमज़ान का महीना आ गया तब भी कफ़्फ़ारा सही नहीं हुआ-
अगर किसी को रोज़ा रखने की ताक़त न हो तो साठ(60) मिस्कीनों को सुबह शाम पेट भर के खाना खिला दे
roza ka kaffare ka bayan in hindi
जितना उनके पेट में समाए खूब तन कर खिलाएं यानि बिल्कुल भूख न रहे-
इन मिस्कीनों में अगर कुछ बिल्कुल छोटे बच्चे हों तो जाएज़ नहीं इन बच्चों के बदले और मिस्केनों को फिर खिलाए-
roza ka kaffare ka bayan
Poor children

अगर गेहूँ की रोटी हो तो रूखी रोटी खिलाना भी दुरुस्त है और अगर जौ बाजरा जवार वग़ैरा की की रोटी हो तो उस के साथ कुछ दाल वग़ैरा (अदि) देना चाहए जिस के साथ रोटी खालें-
roza ka kaffare ka bayan

अगर खाना न खिलाए बल्कि साठ(60) मिस्कीनों को कच्चा अनाज देदे तो भी जाएज़ है हर एक मिस्कीन को इतना इतना दे जितना सदक़ा ए फ़ित्र दिया जाता है- और सदक़ा ए फ़ित्र का बयान इंशाअल्लाह तआला आगे आएगा-
अगर इतने अनाज के कीमत देदे तो भी जाएज़ है-
अगर किसी और से कह दिया कि तुम मेरी तरफ से कफ़्फ़ारा अदा कर दो और साठ(60) मिस्कीनों को खाना खिला दो और उस ने उस की तरफ से खाना खिला दिया या कच्चा अनाज दे दिया तब भी कफ़्फ़ारा अदा हो गया और अगर उस के कहे बिना किसी ने उस की तरफ से दे दिया तो कफ़्फ़ारा सही नहीं हुआ-
अगर एक ही मिस्कीन को साठ(60) दिन तक सुबह शाम खाना खिला दिया या साठ(60) दिन तक कच्चा अनाज या कीमत देता रहा तब भी कफ़्फ़ारा सही हो गया-
अगर साठ(60) दिन तक लगातार खाना नहीं खिलाया बल्कि बीच में कुछ दिन छूट गया तो कुछ हर्ज नहीं यह भी दुरुस्त है-
अगर साठ(60) दिन का अनाज हिसाब कर के एक फ़क़ीर को एक ही दिन दे दिया तो दुरुस्त नहीं-
roza ka kaffare ka bayan in hindi
इसी तरह एक ही फ़क़ीर को एक ही दिन अगर साठ(60) बार कर के दे दिया तब भी एक ही दिन का अदा हुआ एक कम साठ(60) मिस्कीनों को फिर देना चाहए इसी तरह कीमत देने का हुक्म है यानि एक दिन में एक मिस्कीन को एक रोज़े के बदले से ज़्यादा देना दुरुस्त नहीं-
अगर किसी को सदक़ा ए फ़ित्र की मिक़्दार से कम दिया तो कफ़्फ़ारा सही नहीं हुआ-
अगर एक ही रमज़ान के दो या तीन रोज़े तोड़ डाले तो एक ही कफ़्फ़ारा वाजिब है- हाँ अगर यह दोनों रोज़े एक रमज़ान के न हों तो अलग अलग कफ़्फ़ारा देना पड़ेगा-
(बिहिश्ती ज़ेवर)

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