Sunday, 8 March 2020

मौत से मुलाक़ात islamic interesting article

मौत से मुलाक़ात

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एक बूढ़े शख्स का दुनियां में कोई सहारा न था- बुढ़ापे में वह इस तरह गुज़ारा करता कि जंगल में लकड़ियाँ काटने चला जाता सारा दिन लकड़ियाँ काटने और चुनने में गुज़र जाता- शाम होने से पहले लकड़ियाँ बेचने का चारा करता और उन्हें बेच कर रोटी खाता- एक दिन उस की तबियत ठीक न थी- इतनी कमज़ोरी महसूस कर रहा था कि उस से चला न जाता था- लेकिन मरता क्या न करता- लकड़ियाँ जंगल से न लाता तो रोटी कहाँ से खता-
लकड़हारा गिरता पड़ता जंगल में पहुंचा- बड़ी मुश्किल से लकड़ियाँ काटीं- इस के बाद बड़ा सांस लिया- फिर गट्ठा जो उठाया तो सर से पाओं तक कांपने लगा- बड़ी मुश्किल से गट्ठा उठाया- कमज़ोरी तो पहले से ही थी- गट्ठा उठा कर अभी सीने तक लाया था कि बाज़ू जवाब दे गए- गट्ठा ज़मीन पर या रहा- थोड़ी देर फिर सांस लिया- गट्ठा उठाया जो ज़मीन पर आ रहा- लकड़हारा सर पकड़ कर ज़मीन पर बैठ गया- और दर्द की शिद्दत से हांपते हुए आसमान की तरफ नज़रें उठा कर कहने लगा-
,,खुदाया! बुढापे में किस तरह मैं यह मुशक़्क़त (परेशानी) करूं- मुझ से अपना आप नहीं उठाया जाता इतना भारी गट्ठा कैसे उठाऊं? मेरी किस्मत का सितारा कब तक गर्दिश में रहेगा- इस जीने से तो मौत बेहतर है- ए मौत! मुझे इस दुनियां से उठा ले-,,यह सुनते ही अचानक मौत एक तरफ से नमूदार हुई- बोली ,,मुझे किस वास्ते जंगल में पुकारा है?
मौत को देखते ही बूढ़े पर दहशत तारी हो गई- थर थार कांपने लगा और रुक रुक कर कहा-
,,मैं ने तुम्हें इस वास्ते जंगल में पुकारा है कि इस जंगल में दूर और नज़दीक कोई नज़र नहीं आ रहा- यह गट्ठा उठा कर मेरे सर पर टिकादो,,-

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