Thursday, 26 March 2020

एक अंधे आशिक़ का किस्सा (कहानी)

एक अंधे आशिक़ का किस्सा

Interesting article in hindi
Muslim blind

एक अँधा आशिक़ लड़कों को पढ़ाता था, एक लड़के की माँ खुशामद में उस अंधे मुअल्लिम (पढ़ाने वाले) के पास अपने बच्चे के हाथ कभी कभी खाना वगैरा (आदि) भेज दिया करती थीं कभी सलाम कहला भेजती थीं अंधे ने समझा कि औरत मुझ से मोहब्बत करती है इस लिए इस को भी उस से मोहब्बत हो गई
Interesting article in hindi
Muslim women

एक रोज़ इस ने लड़के के हाथ उस की माँ के पास इज़हार ए इश्क़ के साथ मुलाक़ात के दरख़्वास्त का पयाम कहला भेजा, औरत पारस (नेक) थी उसे नागवार हुआ उस ने अपने शौहर से यह बात कही- इन दोनों में यह तय हो गया कि अंधे को उस का मज़ा चखाना चाहये- और उस की सूरत भी तजवीज़ करली करली गई- इस के बाद इस औरत ने हाफ़िज़ जी को लड़के के हाथ बुलवा भेजा हाफ़िज़ जी वक़्त ए महूद पर पहुँच गए इतने में बाहर से आवाज़ आई किवाड़ खिलो- हाफ़िज़ जी यह सुन कर घबरा गए औरत ने कहा घबराओ नहीं मैं अभी इंतिज़ाम कर देती हूँ- तुम यह दुपट्टा ओढ़ कर चक्की पीसने लागो हाफ़िज़ जी ऐसा ही किया इस ने जा कर किवाड़ खोल दिए शौहर अंदर आया, मिली भगत तो थी ही, पोछा यह कौन औरत है- कहा हमारी लौंडी है आटे की ज़रुरत थी इस लिए बे वक़्त चक्की पीस रही है- वह खामूश (चुप) रहा हाफ़िज़ जी ने क्यों चक्की पीसी थी आखिर थक गए और हाथ सुस्त (धीमा) चलने लगा, यह देख कर शौहर उठा, कहा मुर्दार सोती है पीसती क्यों नहीं यह कह कर चंद जूते मारे और आ कर अपनी जगह लेट रहा- हाफ़िज़ जी ने फिर पीसना शुरू किया थोड़ी देर पीसने के बाद फिर हाथ सुस्त चलने लगा उस औरत के शौहर ने फिर जो पहले लिया था गर्ज़ सुबह तक हाफ़िज़ जी से खूब चक्की पिसवाई और खूब जूते से मार पड़ी जब यह देखा कि हाफ़िज़ जी को काफी सजा मिल चुकी है तो शौहर वहाँ से टल गया, औरत ने कहा हाफ़िज़ जी अब मौक़ा है आप जल्दी से तशरीफ़ ले जाएं ऐसा न हो के वह ज़ालिम फिर आ जाए- हाफ़िज़ जी वहाँ से भागे और मस्जिद में दम लिया-
इस के बाद औरत को शरारत सूझी और उस ने लड़के के हाथ फिर सलाम कहला भेजा, हाफ़िज़ जी ने कहा, हाँ मैं समझ गया आटा नहीं रहा होगा-

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