Saturday, 14 March 2020

एक हिन्दू फ़कीर को खोदा ए तआला (इश्वर) को देखने का शौक़ हुआ

एक फक़ीर सन्यासी का वाकिया (कहानी)

interesting article in hindi
Interesting articles

एक जाहिल हिन्दू फ़क़ीर सन्यासी अपना वाकिया बयान करता था कि उस को खुदा ए तआला (इश्वर) के दीदार (देखने) का शोक गालिब हुआ और एक के बाद एक हिन्दू पंडितों से इस शोक को ज़ाहिर किया कि मुझे खुदा ए तआला (इश्वर) को दिखलाओ, सब ने इस से इनकार किया मगर एक महन्त (साधुओं का सरदार) ने वादा किया कि फलां दिन सूरज छुपे दरया के किनारे दिखलाऊंगा उस को शोक गालिब था वक़्त पर पहुंचा- महन्त (साधुओं का सरदार) ने यह हरकत की थी कि एक कछुए के ऊपर गारा जमा कर उस पर चिराग जला कर रख दिया था जब सूरज डूब गया तो अंधेरे में दूर से रोशनी नज़र आई- महन्त (साधुओं का सरदार) ने कहा देखो वो है ख़ुदा उस ने भी देखा- तो रोशनी तो नज़र आती है मगर उस की हालत यह है कि उछलती हुई हरकत कर रही है- यह तहक़ीक़ (जांच) के लिए रोशनी की तरफ दौड़ा- महन्त ने कहा हायें हायें वहां मत जाना जल जाएगा, मर जाएगा- खुदा का दीदार दूर ही से करना चाहये उस ने कहा बाला से अगर मर गया तो कुछ परवाह नहीं में तो खुदा को पास ही से देखूँगा- अगर इस की जोत से जल भी गया तो उस से अच्छा और किया- जब नज़दीक पहुंचा तो देखा कि एक कछुए पर चिराग रखा हुआ है अब तो उस ने महिन्त को खूब लोताड़ा कि यह हरकरत थी वो कहने लगा कि खुदा को भी कोई दिखला सकता है मगर में ने तेरी तसल्ली के वास्ते एक तरकीब की थी यह तो हिन्दू का वाकिया है- एक मुसलमान साहब का वाक़या सुनए कि उस ने एक ज़ाकिर शागिल के सामने दावा किया कि मैं खुदा को दिखला सकता हूँ (नऊज़ुबिल्लाह) वह बेचारा मुश्ताक़ ए दीदार पर आमादा हो गया-
Interesting article in hindi
Interesting articles

इस मुद्दई ने दीदार के लिए उस को मुन्तख़ब किया (चुना) और उन साहब को रात के वक़्त ले गया और मस्जिद में पहुंच कर उस ने कुछ वज़ीफ़ा बतला दिया कि इस को आँखें बंद कर के पढ़ते रहो और जब मैं कहूँ तो उस वक़्त आँखें खोल देना चुनाँचि थोड़ी देर में आप ने हूँ की और उस शख्स ने आँखें खोल कर देखा तो वाक़ई साड़ी मस्जिद में रौशनी ही रौशनी थी मगर उस के साथ भी देखा कि रौशनी के साथ अपना साया भी है- यह पढ़े लिखे आदमी थे फ़ौरन ख्याल हुआ कि नूर ए हक़ के साथ यह साया कैसा? उस की शान है कि
तजल्ली ए हक़ के होते हुए ज़ुल्मत का निशान कहाँ रह सकता है- उस के बाद उस ने पीछे को जो नज़र की तो देखा वह मुद्दई दिया सलाई सलाई हाथ में लिए खड़ा है------- उस वक़्त दिया सलाई पहली पहली बार चली थी देहात में न पहुंची थी उस कम्बख्त ने देहात में दिया सलाई से यह काम लिया कि लोगों के ईमान को जलाने लगा यह देख कर उस शख्स ने जूता निकाल कर खूब मुरम्मत की कि नामाक़ूल आ अब मैं तुझे खुदा दिखलाऊँ तू मख्लूक़ के ईमान को बर्बाद करता है ऐसे भी उस महन्त (साधुओं का सरदार) किया था कि कछुए पर चिराग जला कर तालिब को धोका दिया वह हिन्दू कहता था कि फिर मैं दीदार ही के शोक में मुसलमान हो गया मैं ने उस से कहा कि जब तू खुदा ए तआला को देखने के वास्ते मुसलमान हुआ है तो यह बात तो इस्लाम से भी दुनियां में हासिल नहीं हो सकती हाँ (इंशाअल्लाह) आखरत में यह दौलत हासिल होगी तो जब तू दुनियां में खुदा को देखेगा नहीं फिर मुसलमान ही कैसे रहेगा- उस शख्स ने कहा मुझे इस्लाम में एक ऐसी खूबी साबित होती है कि चाहे दुनियां में खुदा का दीदार हो न हो मगर इस्लाम को न छोड़ूंगा- मैं ने कहा वह खूबी किया है कहने लगा कि इस्लाम में तौहीद बहुत कामिल है मैं ने कहा तुझे इस्लाम की तौहीद का कामिल होना किस बात से मालूम हुआ- कहा इस तरह मालूम हुआ कि जब कोई दुसरे मज़हब का आदमी इस्लाम लाता है तो मुसलमान उस को उसी वक़्त अपने से अफ़ज़ल (बेहतर) जानने लगते हैं और उस के साथ खाने पीने लगते हैं-
फायदा यह तौहीद ए इस्लामी का असर है, यह बात किसी मज़हब में नहीं-

नोट : अगर पोस्ट अच्छा लगा तो अपने Facebook WhatsApp Twitter Instagram पर शेयर ज़रूर ज़रूर करें

No comments:

Post a comment