Sunday, 15 March 2020

अल्लाह वालों की शान

अल्लाह वालों की शान

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एक बुज़ुर्ग थे उन के पास एक मर्द और एक औरत अपने बच्चे को लाए जो मादर ए ज़ाद अंधा था- यानी वह माँ के पेट ही से अंधा पैदा हुआ था- और दोनों रोने लगे कि हज़रत पहली बार तो हमारे औलाद ही न हुई थी- बहुत दुआएं की मन्नतें मानें तब तो कहीं यह बच्चा इनायत हुआ मगर अफ़सोस हम लोग फिर भी महफूज़ व मसरूर न हो सके क्योंकि यह अँधा पैदा हुआ- अब इस को देख देख कर हर वक़्त जी कुढ़ता है- हम ने सुना है कि आप बहुत बड़े मक़बूल अल्दावात (जिस की दुआ ज़रूर क़ुबूल होती) बुज़ुर्ग हैं लिल्लाह हमारे हाल ए ज़ार पर रहम फरमाए और दुआ कर दीजये कि इस की आँखें अच्छी हो जाएं- उस ज़माना के लोग आज कल की तरह बदअक़ीदा न थे यह नहीं कहा कि आप अच्छा करदें बल्कि यह कहा कि दुआ करदें मगर यह दरख़्वास्त सुन कर भी कमाल ए इंकिसार के ग़लबा से आप को जोश आ गया- और फरमाने लगे बिगड़ कर कि मैं ईसा (अलैहिस्सलाम) हूँ जिन की दुआ से अंधे मादर ए ज़ाद अच्छे हो जाते थे- वह बेचारे मायूस और शिकस्ता दिल हो कर चले गए- बस उन का जाना था कि इन बुज़ुर्ग की ज़बान पर बे इख्तियार यह जारी हो गया- माकुनीम माकुनीम ...... हम अच्छा करेंगे, हम करेंगें लाओ इस को बुला कर- खुद्दाम (अस्टाफ) को बड़ी हैरत हुई कि या तो ईसा (अलैहिस्सलाम) भी न बनते थे या अब खुदा बनने लगे- मगर इस वक़्त कुछ कहना बेअदबी था- दौड़ कर उस को बुला लाए- आप ने अपना हाथ इस बच्चे की आँखों पर फैर दिया- बस हाथ फेरते ही आँखें अच्छी खासी हो गईं और वह लोग दुआएं देते हुए खुश खुश अपने बच्चा को घर ले गए- उस के चले जाने के बाद मोका पा कर बाज़ ख्वास खादिमों ने अर्ज़ किया कि हज़रत यह समझ में नहीं आया कि या तो दुआ करना भी गवारा न था या एक साथ ऐसे दावे के अलफ़ाज़ फरमाने लगे- माकुनीम माकुनीम- ماكنيم ماكنيم
आप ने फ़रमाया भाई यह मैं नहीं कहता था- बात यह है कि जिस वक़्त वह लोग चले गए तो मुझ पर इताब हुआ कि तुम ने जो ईसा का नाम लिया था तो किया वह अच्छा करते थे, क्या वह क़ादिर ए मुतलक़ थे और गाफिल ए हक़ीक़ी या हम थे- हम तो अब भी क़ादिर ए मुतलक़ हैं- फिर क्यों नहीं हम से अर्ज़ किया- अगर अच्छा करते तो हम करते- तुम कौन थे इस को मायूस करने वाले- और अगर अब भी अच्छा करेंगे तो हम करेंगे- गर्ज़ इधर तो वह मायूस हो कर चले गए और फिर उधर इताब हुआ और बे इख्तियार मेरे मुंह से वही अलफ़ाज़ खुदा ए तआला के निकलने लगे. माकुनीम माकुनीम - ماكنيم ماكنيم
मैं तौबा तौबा यह अल्फ़ाज़ (शब्द) कैसे कह सकता था- मेरी भला किया मजाल है- वह तो हक़ तआला फरमाते थे- मैं थोड़ा ही कह रहा था-
फायदा_! बहुत से अल्लाह वालों की यह हालत होती है और जब औलिया अल्लाह (अल्लाह वालों) की यह शान है तो अल्लाह के पैग़म्बरों की शान का किया कहना-

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