Tuesday, 24 March 2020

अल्लाह के क़हर से डरो

अल्लाह के क़हर से डरो

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Died of pain

हकीमु अल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ अली थानवी (रहमतुल्लाहि अलैह) अपनी किताब में लिखें हैं कि जिस ज़माना में मेरे मामू मुंशी शौकत अली साहब मदरसा सरकारी में मुदर्रिस (उस्ताद) थे उस ज़माना में एक इन्सपैक्टर मदरसा में इम्तिहान के लिए आए, इम्तिहान में उन्हों ने लड़कों से अपने मंसब (काम) के खिलाफ सवाल किया कि बताओ कि खुदा की हस्ती की किया दलील है लड़के बेचारे किया जवाब देते वह खामूश रहे- मामू साहब ने फरमाया कि मुझ से पूछए मैं जवाब दूंगा______ इन्सपैक्टर साहब अपनी अफसरी के घमंड में थे, उन्हों ने नाख़ुशी के लहजा में फरमाया कि अच्छा आप ही जवाब दीजये, मामू साहब ने फरमाया कि खुदा की हस्ती की दलील यह है कि पहले तुम मादूम (फनां) थे और अब मौजूद हो और हर हादिस (नई चीज जो पहले से न हो) के लिए कोई इल्लत होनी चाहये वह इल्लत खुदा है. _______ उस ने जवाब दिया कि हम को तो हमारे माँ बाप ने पैदा किया न कि खुदा ने_____ मामू साहब ने फरमाया कि आप के माँ बाप को किस ने पैदा किया,______ उस ने कहा, उन के माँ बाप ने, मामू साहब ने फरमाया दो हाल (वर्तमानकाल) से खाली नहीं या यूँही सिलसिला चला जावेगा या कहीं जाकर ख़तम होगा, पहली सूरत में तसलसुल (सिलसिला) लाज़िम आएगा जो कि महाल है दूसरी सूरतें खुदा का वजूद मानना पड़ेगा उस इससे कुछ जवाब न आया और उस ने कहा आप तो मंतिक की बातें करते हैं गर्ज़ कहने लगा कि हम इन मंतिकी बातों को नहीं जानते हम तो सीधी बात जानते हैं और वह ये कि अगर खुदा है तो आप अपने खुदा से कहए कि हमारी आँख दुरुस्त (सही) करदे यह इन्सपैक्टर काना था, मामू साहब निहायत ज़रीफ़ (ख़ुश मिजाज़) थे उन्हों ने कहा बहुत बेहतर है मैं अभी कहता हूँ यह कह कर उन्हों ने आँखें बंद कर के आसमान की तरफ मुंह किया और थोड़ी देर बाद उन्हों ने इन्सपैक्टर साहब से कहा मैं ने अर्ज़ किया था मगर वहाँ से यह जवाब मिला कि हम ने उस को दो आँखें अता की थीं उस ने हमारी नेमत की नाशुक्री की और कहा कि हमारे माँ बाप ने पैदा किया है हमें इस पर गुस्सा आया हम ने उस की एक आँख फोड़ दी अब उस से कहो कि तू इस आँख को अपने उन्हें माँ बाप से बनवाओ जिन्हों ने तुझे पैदा किया है- इस जवाब पर उस को बहुत गुस्सा आया उस का और तो कुछ बस न चला मगर मुआयना खराब लिख गया इस गुस्ताखी का यह नतीजा हुआ कि थोड़े दिन के अंदर दर्द उठा और हलाक हो गया-
फायदा याद रखो अल्लाह तआला का क़हर दो तरह का होता है कभी तो सूरतन (देखने वाला) भी क़हर होता है और कभी क़हर बसूरत लुत्फ़ होता है यह क़हर, पहली क़हर से ज़्यादा खतरनाक होता है-


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