Tuesday, 10 March 2020

ज्ञान का वृक्ष (पेड़) interesting article

इल्म का दरख़्त

इल्म का दरख़्त interesting article in Hindi
Interesting article

पुराने वक़्तों की बात है कि एक बादशाह के पास एक इंतिहाई अक्लमंद और दाना शख्स आया जिस ने बहुत सी दानाई की बातें बयान की बातों बातों में उस ने कहा कि हिंदुस्तान में एक ऐसा दरख़्त (पेड़) है कि जिस किसी ने भी इस का फल खा लिया न ही कभी बूढा हुआ और न उस को कभी मौत आई- वह आदमी तो यह बात कर के चला गया- मगर बादशाह के दिल में यह ख्वाहिश पैदा हो गई कि किस तरह उस दरख़्त के फल को हासिल करना चाहये- चुनाँचि बादशाह ने इस मक़सद के लिए एक बहुत ही अक्लमंद और समझदार क़ासिद (Messenger दूत) को इस दरख़्त की तलाश के लिए हिंदुस्तान की तरफ रवाना किया वह क़ासिद कई माह तक हिंदुस्तान में इस दरख़्त की तलाश के लिए फिरता रहा वह जिस से भी इस किस्म के दरख़्त के बारें में दरयाफ्त करता वह इस का मज़ाक़ उड़ाता गर्ज़यहकि वह क़ासिद दरख़्त की तलाश में मारा मारा फिरता रहा लोग उस को बेक़ूफ़ और पागल समझने लग गए थे आखिर एक दिन वह इस तलाश से तंग आ गया और उस ने वापसी का इरादा कर लिया क्योंकि वह मायूस हो चूका था कई सालों की उस की मेहनत बेकार चली गई थी इस दौरान बादशाह उस को बहुत सा माल भी भेजता रहा था- अब जब वह तलाश से आजिज़ हो गया तो उस ने रोते हुए वापसी का सफर शुरू किया-
रास्ते की मंज़िलें तय करते हुए उस ने एक जगह पर पड़ाव किया क़रीब ही अल्लाह का एक नेक बन्दा अपनी झुगी (झोंपड़ी) में बैठा इबादत में मसरूफ था वह क़ासिद इस बुज़ुर्ग की खिदमत में हाज़िर हुआ और उस से अपने लिए दुआ करने की दरख़्वास्त की बुज़ुर्ग ने उस की तरफ देखा और पूछा कि तू किस मक़सद के लिए इधर आया है? कहने लगा कि फलां बादशाह ने मुझे इस काम के लिए मुंतखब (चुनाव) कर के भेजा है ताकि मैं हिंदुस्तान में एक ऐसे दरख़्त की तलाश करूं जिस का फल आब ए हयात का दर्जा रखता है मैं ने मुद्दतों उस दरख़्त को तलाश किया है मगर मुझे इस का कोई निशान नहीं मिला जिस से भी इस बारे में पूछता हूँ वही मेरा मज़ाक़ उड़ाता है अब मायूस हो कर वापसी का सफर इख्तियार किया है-
वह बुज़ुर्ग बादशाह के क़ासिद (Messenger दूत) की बात सुन कर हंसे और फ़रमाया, ए भले इंसान! जिस दरख़्त की तुम्हें तलाश है वह तो इल्म (ज्ञान) का दरख़्त है जिस का फल आब ए हयात का सरमाया है- क़ासिद ने जब यह सूना तो उस की तमाम मायूसी राहत (आराम) में बदल गई और वह खुशी खुशी बादशाह के दरबार की तरफ चल दिया-

नोट : अगर पोस्ट अच्छा लगा तो अपने Facebook WhatsApp Twitter Instagram पर शेयर ज़रूर करें

No comments:

Post a comment