Thursday, 19 December 2019

जब न्याय न रहे (When justice is over)

तोते के साथ जज का गलत फैसला

जब न्याय न रहे

कहते हैं कि एक तोता तोती का गुज़र एक वीराने से हुआ, वीरानी देख कर तोती ने तोते से पूछा ''किस कदर वीरान गाँव है ,,,,?
''तोते ने कहा लगता है यहाँ किसी उल्लू का गुज़र हुआ है जिस वक़्त तोता तोती बातें कर रहे थे अचानक उस वक़्त एक उल्लू भी वहां से गुज़र रहा था, उस ने तोते बात सुनी और वहां रुक कर इन से मुख़ातब (संबोधित) हो कर बोला, तुम लोग इस गाँव में मुसाफिर लगते हो, आज रात तुम लोग मेरे मेहमान बन जाओ, मेरे साथ खाना खाओ, उल्लू की मोहब्बत भरी दावत से तोते का जोड़ा इंकार न कर सका और उन्हों ने उल्लू की दावत क़ुबूल कर ली, खाना खा कर जब उन्हों ने रुखसत होने की इजाज़त चाही ..
तो उल्लू ने तोती का हाथ पकड़ कर कहा ..
तुम कहाँ जा रही हो
तोती परेशान हो कर बोली यह कोई पूछने की बात है, मैं अपने खाविंद (पति) के साथ वापस जा रही हूँ---, उल्लू यह सुन कर हँसा और कहा.. यह तुम किया कह रही हो तुम तो मेरी बीवी हो. इस पे तोता तोती उल्लू पर झपट पड़े और गरमा गरमी शुरू हो गई, दोनो में बहस व तकरार (चर्चा) ज्यादा बढ़ी तो उल्लू ने तोते के सामने एक तजवीज़ (सुझाव) पेश करते हुए कहा
''ऐसा करते हैं हम तीनो अदालत चलते हैं और अपना मुक़दमा क़ाज़ी के सामने पेश करते हैं, क़ाज़ी जो फैसला करे वह हमें क़ुबूल होगा''
उल्लू की तजवीज़ पर तोता और तोती मान गए और तीनों क़ाज़ी की अदालत में पेश हुए, क़ाज़ी ने दलाइल (सुबूत) के रौशनी में उल्लू के हक़ में फैसला दे कर अदालत बर्खास्त करदी, तोता इस बे इंसाफी पर रोता हुआ चल दिया तो उल्लू ने उसे आवाज़ दी,
''भाई अकेले कहाँ जाते हो अपनी बीवी को साथ लेते जाओ, तोते ने हैरानी से उल्लू की तरफ देखा और बोला ''अब कियौं मेरे ज़ख्मों पर नमक छिड़कते हो, यह अब मेरे बीवी कहाँ है , अदालत ने तो उसे तुम्हारी बीवी क़रार दे दिया है'' उल्लू ने तोते की बात सुन कर नरमी से बोला, नहीं दोस्त तोती मेरी नहीं तुम्हारी ही बीवी है- मई तुम्हें सिर्फ यह बताना चाहता था कि बस्तियाँ उल्लू वीरान नहीं करते. बस्तियाँ तब वीरान होती हैं जब इन से इंसाफ उठ जाता है?

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