Monday, 16 December 2019

Animal justice जानवर का इंसाफ

जानवर का इंसाफ
एक जज ने अपनी कहानी सुनाई :

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मैं एक जगह सत्र (Sessions) जज लगा हुआ था. एक केस आया, एक मुल्ज़िम (आरोपी) मेरे सामने पेश किया गया जिस पर क़तल (हत्या) का इलज़ाम (दोष) था, सारे सुबूत इस के खिलाफ थे. मगर वह था बहुत मासूम शकल, और रोता और चींख्ता भी था कि मैं ने यह कतल नहीं किया. इस की मासूमियत से यह पता चलता था कि इस ने कतल नहीं किया लेकिन सुबूत यह बताते थे कि उस ने क़तल किया है.
मेरी जीवन का तजुर्बा (अनुभव) था, मेरे तजुर्बात और उस की मासूमियत यह बताती थी कि उस ने क़तल नहीं किया. इस लिए मेरी कोशिश यह शुरू हो गई कि उस को बचा लूँ. इसी कोशिश में लगभग तीन महीने मैं ने इस फैसले को लम्बा किया लेकिन मेरी कोशिश नाकाम (विफल) रही. मैं सारा दिन इसी के बारे में सोचता रहता था. मेरी जीवन का कोई यह अजीब फैसला था. अंत में मैं ने उस को सज़ाए मौत लिख दी.
दूसरे दिन उस को सज़ए मौत होनी थी मैं उस के पास गया और पूछा कि सच सच बताओ तुम ने क़तल किया है?
कहने लगा, जज साहब मैं सच कहता हूँ कि मैं ने कतल नहीं किया.
मैं ने कहा, तुम ने कौन सा ऐसा जुर्म (अपराध) किया है जिस की तुम्हें यह सज़ा मिल रही है?
कुछ देर सोचने के बाद कहने लगा, साहब जी मैं ने एक गुनाह किया है, मुझे याद आ गया है, वह ये कि मैं ने एक कुतिया को बड़ी बे दर्दी से मारा था और वह मर गई थी, बस वह क़तल मैं ने किया है.
मैं तुरंत चौंक पड़ा, और उसे कहा, तभी तो जब से तुम्हारा केस मेरे पास आया है, आज तीन महीने हो गए हैं, रोजाना जब मैं घर जाता हूँ तो एक कुतिया मेरे दरवाज़े पर बैठी होती है, और चियाओं चियाओं करती है और अपनी भषा में मुछ से इंसाफ के लिए कहती. "
जज साहब ने बताया कि दूसरे दिन उस आदमी को फाँसी हो गई और मुझे सबक़ मिला, वह यह कि अल्लाह की मखलूक़ (जीव‌‍‌) पर जुल्म करने वाले को अल्लाह ज़रूर सज़ा देता है, उस के घर में देर है अंधेर नहीं. हमारी नज़र में जो जीव हक़ीर (तुच्छ) और नजिस है लेकिन बनाने वाले को वह मखलूक़ कितनी प्यारी है...

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