Wednesday, 8 May 2019

रोजे़ रखने के फायदे और न रखने पर गुनाह

रोज़े की फज़ीलत और न रखने पर वईद (अज़ाब)

roza rakhne ke fayde, roza rakhne ke fayede aur na rakhne ka gunah

हदीस शरीफ में रोज़ा का बड़ा सवाब आया है और अल्लाह तआला के नज़दीक रोज़ादार का बड़ा रुतबा है नबी अलैहि स्सलाम ने फरमाया है कि जिस ने रमज़ान के रोज़े सिर्फ़ और सिर्फ अल्लाह तअाला के वास्ते सवाब समझ कर रखे तो उस के सब अगले गुनाह सगीरह बख्श दिये जावेंगे और नबी अलैहि स्सलाम ने फरमाया है कि रोज़ादार के मुँह के बदबू अल्लाह तअाला के नज़दीक मुश्क की खुशबू से भी प्यारी है क़यामत के दिन रोज़ा का बेहद सवाब मिलेगा

रवायत

है कि रोजादारों के वास्ते क़यामत के दिन अर्श के तले दस्तरख़्वान चुना जायेगा और वह लोग उस पर बैठ कर खाना खावेंगे और सब लोग हिसाब ही में फंसे होंगे - इस पर वह लोग कहेंगे कि यह लोग कैसे हैं कि खाना खा पी रहे हैं और हम अभी हिसाब ही में फंसे हुए हैं - इन को जवाब मिलेगा कि यह लोग रोज़ा रखा करते थे और तुम लोग रोज़ा न रखते थे - यह रोज़ा भी दीन ए इसलाम का बड़ा रुक्न है जो कोई रमज़ान के रोज़े न रखेगा बड़ा गुनाह होगा और उस का दीन कमज़ोर हो जायेगा?

रोज़े की नियत ( बिसौमि ग़दिन नवैतु मिंशहरि रमज़ान )
रोज़ा खोलने की दुआ
( अल्लाहुम्मा लकासुमतु व बि क आमंतु व अला रिज़क़ि क अफत़रतु )


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