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Saturday, 4 May 2019

चाँद देखने का बयान हिन्दी में

चाँद देखने का बयान

मसअलह (1)

             अगर आसमान पर बादल है या गर्द गुबार है इस वजह से रमज़ान का चाँद नज़र नहीं आया लेकिन एक दीनदार परहैज़गार सच्चे आदमी ने आकर गवाही दी के मैं ने रमज़ान का चाँद देखा है तो चाँद का सुबूत हो गया चाहे वह मर्द हो या औरत हो

मसअलह (2)

             और अगर बदली की वजह से ईद का चाँद ना दिखाई दिया तो ऐक शख्स की गवाही का एतबार नहीं है चाहे जितना बड़ा मोतबर आदमी हो बल्कि जब दो मोतबर और परहैज़गार मर्द या एक दीनदार मर्द और दो 2 दीनदार औरतें अपने चाँद देखने की गवाही देवें तब चाँद का सुबूत होगा - और अगर चार औरतें गवाही दें तो भी क़ुबूल नहीं -

मसअलह (3)

               जो आदमी दीन का पाबंद नहीं बराबर गुनाह करता रहता है मसलन (उदाहरन के लिए) नमाज़ नहीं पढ़ता या रोज़ा नहीं रखता या झूठ बोला करता है या और कोई गुनाह करता है शरीअत की पाबंदी नहीं करता तो इसलाम में इसकी बात का कुछ एतबार नहीं है - चाहे जितनी क़समें खा कर के बयान करे बल्कि ऐसे अगर दो आदमी हों उनका भी एतबार नहीं -

मसअलह (4)

               यह जो मशहूर है कि जिस दिन रजब की चोथी उस दिन रमज़ान की पहली होती है शरीअत (इसलाम) में उस का भी कुछ एतबार नहीं है अगर चाँद ना हो तो रोज़ा ना रखना चाहिए -

मसअलह (5)

             चाँद देख कर यह कहना कि चाँद बहुत बड़ा है कल का मालूम होता है बुरी बात है हदीस में आया है कि यह कयामत की निशानी है जब कयामत करीब होगी तो लोग ऐसा कहा करेंगे - खुलासा यह कि चाँद का बड़े छोटे होने का भी कुछ एतबार न करो न हिंदुओं की इस बात का एतबार करो कि आज दोइज है आज जरूर चाँद है शरीअत (इसलाम) से यह सब बातें वाहियात हैं

मसअलह (6)

            अगर आसमान बिल्कुल साफ हो तो दो चार आदमियों के कहने और गवाही से भी चाँद साबित न होगा चाहे रमज़ान का चाँद हो चाहे ईद का अलबत्ता इतनी कस़रत से लोग अपना चाँद देखना बयान करें कि दिल गवाही देने लगे कि यह सब के सब बात बना कर नहीं आए हैं इतने लोगों का झूठा होना किसी तरह नहीं हो सकता तब चाँद साबित होगा

मसअलह (7)

             शहर भर में यह खबर मशहूर है कल चाँद हुवा बहुत लोगों ने देखा लेकिन बहुत ढूँडा तलाश किया फिर भी कोई ऐसा आदमी नहीं मिलता जिस ने खुद चाँद देखा हो तो एसी खबर का एतबार नहीं है
मसअलह (8)
              किसी ने रमज़ान शरीफ का चाँद अकेले देखा सिवाए उसके शहर भर में किसी ने नहीं देखा लेकिन यह शर्अ की पाबंदी नहीं है तो उसकी गवाही से शहर वाले तो रोज़ा न रखें लेकिन खुद यह रोज़ा रखे ओर अगर इस अकेले देखने वाले ने तीस रोज़े पूरे कर लिए लेकिन ईद का चाँद नहीं दिखाई दिया तो एकतीसवां 31 रोज़ा भी रखे और शहर वालों के साथ ईद करे -
मसअलह (9)
अगर किसी ने ईद का चाँद अकेले देखा इस लिए इस की गवाही का शरीअत (इसलाम के क़ानून)  ने एतबार नहीं किया तो इस देखने वाले आदमी को भी ईद करना दुरुस्त नहीं है सुबह को रोज़ा रखे और अपने चाँद देखने का एतबार न करे और रोज़ा न तोड़े ?

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