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Friday, 19 April 2019

शबे बरात का हलवा और आतिशबाजी का बयान شبِ بَرات کا حلوہ اور آتشبازی کا بیان

شبِ بَرات کا حلوہ اور آتشبازی کا بیان
शबे बरात का हलवा और आतिशबाजी का बयान


شبِ برات کی اتنی اصل ہے کہ پندرھویں رات اور پندرھواں دن اس مہینے کا بہت بزرگی اور برکت کا ہے - ہمارے پیغمبر صلَّی اللّٰہُ عَلیہِ وَسلَّم نے اس رات کو جاگنے کی اور اس دن کو روزہ رکھنے کی رغبت دلائی ہے -

शबे बरात की इतनी मूल है कि इस महीने के पंद्रहवें रात और पंद्रहवें दिन इस महीने की बहुत बुजुर्गी और बरकत का है- हमारे पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) इस रात को जागृत (जागने) की और दिन में उपवास यानी (रोज़ा) रखने की रोग़बत दिलाई है -

اور اس رات میں ہمارے حضرت صلَّی اللّٰہُ عَلیہِ وسلَّم نے مدینہ کے قبرستان میں تشریف لے جا کر مُردوں کے لئے بخشش کی دعاء مانگی ہے - تو اگر اس تاریخ میں مُردوں کو کچھ بخش دیا کرے چاہے قرآن شریف پڑھ کر چاہے کھانا کھلا کر ؛ چاہے نقدے دے کر؛ چاہے ویسے ہی دعاء بخشش کی کردے تو یہ طریقہ سنت کے موافق ہے - اس سے زیادہ جتنے بکھیڑے لوگ کر رہے ہیں اس میں حلوے کی قید لگا رکھی ہے ؛ اور اس طریقے سے فاتحہ دلاتے ہیں اور خوب پابندی سے یہ کام کرتے ہیں یہ سب واہیات ہیں ؛ جو چیز شرع میں ضروری نہ ہو اُس کو ضروری سمجھنا یا حد سے زیادہ پابند ہو جانا بری بات ہے -
और इस रात में हमारे पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मदीना के कब्रिस्तान में तशरीफ ले जा कर मुर्दों के लिए बख़शिश की दुआ मांगी है- यदि इस तारीख में मुर्दों को कुछ बख्श दिया करे, चाहे कुरान शरीफ पढ़ कर  चाहे खाना खिला कर,  चाहे नकदे पैसा किसी गरीब को दे कर के, चाहे वैसे ही दुआ बखशिश की कर दे, तो यह तरीका सुन्नत के मुवाफिक अनुकूल है - इस से ज़्यादा जितने बखेड़े लोग कर रहे हैं इस में हलवे की कैद लगा रखी है, और इस तरीका से फातिहा दिलाते हैं, और खूब पाबंदी से यह काम करते हैं, यह सब वाहियात हैं- जो शर्अ (इसलाम का मज़हब) में महत्वपूर्ण ना हो उस को ज़रूरी समझना या हद से ज़्यादा पाबंद हो जाना बुरी बात है-

اور بعضے جاہل شبِ بَرات میں آتشبازی کا سامان کرتے ہیں ؛ شبِ بَرات میں یا شادی میں انار پٹاخے یا اور آتشبازی کرنے میں کئی گناہ ہیں' اوّل مال برباد جاتا ہے - قرآن شریف میں مال کے فضول اُڑانے والوں کو شیطان کا بھائی فرمایا ہے - اور ایک آیت میں فرمایا ہے کہ مال فضول اُڑانے والوں کو اللّٰہ تعالٰے نہیں چاہتے ؛ یعنی اُن سے بیزار ہیں - دوسرے ہاتھ پاؤں کے جلنے کا اندیشہ یا مکان میں آگ لگ جانے کا خوف ؛ اور اپنی جان یا مال کو ایسی ہلاکت اور خطرے میں ڈالنا خود شرع میں برا ہے - تیسرے لکھے ہوئے کاغذ آتشبازی کے کام میں لاتے ہیں ؛ خود حروف بھی ادب کی چیز ہیں اس طرح کے کاموں میں ان کو لانا منع ہے ؛ بلکہ بعض بعض کاغذوں پر قرآن کی آیتیں یا حدیثیں یا نبیوں کے نام لکھے ہوتے ہیں - بتلاؤ تو سہی اُن کے ساتھ بےادبی کرنے کا کتنا بڑا وبال ہے - آپ اپنے بچوں کو ان کاموں کے واسطے کبھی پیسے مت دو - یہ سب بدعت اور گناہ کی باتیں ہیں?


और कुछ जाहिल लोग शबे बरात में आतिशबाजी करते हैं; शबे बरात में या शादी में अनार पटाखे या आतिशबाज़ी कर ने में कई पाप (गुनाह) हैं। ’पहली धन बर्बाद जाता है- कुरआन शरीफ में धन के फुज़ूल उड़ाने वालों को शैतान के भाई कहा है। और एक आयत में यह कहा गया है कि माल फुज़ूल उड़ाने वालों को अल्लाह तआला नहीं चाहते, यानी वे उनसे अनभिज्ञ हैं - दूसरे हाथ पैर जलने का ख़तरा या घर में आग लगने का डर,


और अपनी जीवन या धन को ख़तरे में डालना, खुद शर्अ (कानून) में बुरा है - तीसरे लिखे हुए कागज को आतिशबाजी के काम में लाते हैं, स्व-वर्णमाला भी साहित्य का विषय है, उन्हें ऐसे कार्यों में लाना स्वीकार्य नहीं है, बल्कि कुछ अन्य कागजों पर कुरान की आयतें या हदीसें या पैगंबरों के नाम लिखे हुए होते हैं - बतलाओ तो सही उनके साथ बेअदबी कितना बड़ा वबाल (गुनाह) है - आप अपने बच्चों को इन कार्यों के लिए कभी पैसा ना दें। ये सब बिदअत और गुनाह की बातें हैं?

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