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Thursday, 28 March 2019

بنی اسرائیل کے تین شخص کی کہانی (इज़राइल के तीन पुरुषों की कहानी)

بنی اسرائیل کے تین شخص کی کہانی

پہلا کوڑھی

رسول اللہ صلی اللہ علیہ وسلم نے ایک مرتبہ فرمایا کہ بنی اسرائیل میں تین آدمی تھے_ایک کوڑھی _دوسرا گنجا_تیسرا اندھا_ خدا نے انکو آزمانا چاہا اور ان کے پاس ایک فرشتہ بھیجا_ پہلے وہ کوڑھی کے پاس آیا اور پوچھا تجھکو کیا چیز پیاری ہے_ اُس نے کہا مجھے اچھی رنگت اور خوبصورت کھال مل جاوے اور یہ بلا جاتی رہے جس سے لوگ مجھکو اپنے پاس بیٹھنے نہیں دیتے اور گھن کرتے ہیں اُس فرشتہ نے اپنا ہاتھ اس کے بدن پر پھیر دیا_ اُسی وقت چنگا ہو گیا اور اچھی کھال اور خوبصورت رنگت نکل آئی _ پھر پوچھا تجھکو کون سے مال سے زیادہ رغبت ہے اُس نے کہا اونٹ سے_ پس ایک گابھن اونٹنی اس کو دیدی اور کہا الله تعالى  اس میں برکت دے
https://youtu.be/kYUfavmR56o



इज़राइल के तीन पुरुषों की कहानी

पहला कुष्ठरोगी (कोढ़ी)

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक बार कहा , इज़राइल में तीन आदमी थे- एक कुष्ठरोगी (कोढ़ी)  दूसरा गंजा (टकला) तीसरा अंधा ईश्वर ने एक दूत (फरिश्ता) भेजा उन्होंने कोढ़ी से आकर पूछा कि तुम्हारे लिए क्या अच्छा है। उन्होंने कहा। मुझे अच्छी रंगीन चमड़ी और सुरुचिपूर्ण खोपड़ी प्राप्त करें जिसके द्वारा लोग मुझे अपने पास बैठने नहीं देते और मुझसे घिन करते हैं, और स्वर्गदूत उसके शरीर पर अपना हाथ डालता है। उस समय वह ठीक हो गया और एक अच्छी खोपड़ी और सुंदर रंग मिला गया। फिर पूछा गया कि तुमहारे लिए कोन सी धन राशि बेहतर है, उस ने कहा, "ऊंट से" तो उस स्वर्गदूत (फरिश्ते) ने एक गाभिन ऊँटनी उस को देदी और कहा अल्लाह तआला (ईश्वर) इस में आशीष (बरकत) दे_

 دوسرا گنجا

پھر گنجے کے پاس آیا اور پوچھا_ تجھ کو کونسی چیز
پیاری ہے _ کہا میرے بال اچھے نکل آئیں اور یہ بلا مجھ سے جاتی رہے کہ لوگ جس سے گھن کرتے ہیں _ فرشتے نے اپنا ہاتھ اس کے سر پر پھیر دیا ؛ فورًا اچھا ہو گیا اور اچھے بال نکل آئے_ پھر پوچھا تجھکو کونسا مال پسند ہے_ اس نے کہا گائے؛ پس اس کو ایک گابھن گائے دیدی اور کہا اللہ تعالی اس میں برکت بخشے _

दूसरा गंजा (टकला) 

फिर गंजे के पास आया और पूछा, "तुम्हारा क्या भला है?" उस ने कहा मेरे बाल अच्छे निकल आए, और यह बात मुझसे दूर हो  कि जो व्यक्ति उनसे लड़खड़ाता है - स्वर्गदूत ने उसके सिर पर हाथ रखा; और अच्छे बाल निकले। फिर तुम किस तरह की दौलत पसंद करते हो? उन्होंने कहा, 'गाय' इसलिए उसने उसे एक मुट्ठी (गाभिन) गाय दी और कहा, 'अल्लाह उस में आशीष दे।'


تیسرا اندھا 


پھر اندھے کے پاس آیا اور پوچھا تجھکو کیا چیز چاہئے_ اس کہا اللہ تعالیٰ میری نگاہ درست کردے کہ سب آدمیوں کو دیکھوں اس فرشتے نے آنکھوں پر ہاتھ پھیر دیا_ اللہ تعالیٰ نے اُس کی نگاہ درست کردی_ پھر پوچھا_ تجھ کو کیا مال پیارا ہے کہا_ بکری_ پس اس کو ایک گابھن بکری دے دی_

تینوں کے جانوروں نے بچے دیئے_ تھوڑے دنوں میں اُس کے اُونٹوں سے جنگل بھر گیا اور اُس کی گایوں سے اور اُس بکریوں سے_

तीसरा अंधा


फिर वह अंधे के पास आया और पूछा कि आपको क्या चाहिए। उसने कहा, "अल्लाह, कृपया सुनिश्चित करें कि मैं सभी पुरुषों को देखों, इस देवदूत ने उसकी आंखों पर हाथ रखा। अल्लाह ने उसे ठीक कर दिया।" फिर उस को एक गाभिन बकरी देदी।'


तीनों के जानवरो ने बच्चा दिया। कुछ ही दिनों में, उसके ऊँटों से जंगल! और गायों और बकरियों से भर गए।

پھر وہ فرشتہ خدا کے حکم سے اُسی پہلی صورت میں کوڑھی کے پاس آیا اور کہا کہ میں ایک مسکین ہوں میرے سفر کا سب سامان ختم ہوگیا_ آج میرے پہنچنے کا کوئی وسیلہ نہیں سوائے خدا کے اور پھر تیرا_ میں اُس اللہ کے نام پر جس نے تجھکو اچھی رنگت اور عمدہ کھال عنایت فرمائی؛ تجھ سے ایک اونٹ مانگتا ہوں کہ اس پر سوار ہو کر اپنے گھر پہنچ جاؤں؛ وہ بولا یہاں سے چل دور ہو_ مجھے اور بہت حقوق ادا کرنے ہیں_ تیرے دینے کی اِس میں گنجائش نہیں_ فرشتہ نے کہا_ شاید تجھکو میں پہچانتا ہوں_ کیا تو کوڑھی نہیں تھا کہ لوگ تجھ سے گھن کرتے تھے_ اور کیا تو مفلس نہ تھا پھر تجھکو خدا نے اِس قدر مال عنایت فرمایا- اُس نے واہ کیا خوب- یہ مال تو میری پشتوں سے باپ دادا کے وقت سے چلا آتا ہے - فرشتہ نے کہا- اگر تو جھوٹا ہو تو خدا تجھکو ویسا ہی کردے جیسا پہلے تھا-
तब देवदूत पहली प्रारूप भगवान की आज्ञा से कुष्ठ के पास आए और कहा, "मैं एक सहायक हूं, मेरी यात्रा का सारा सामान खत्म हो गया है। आज, मुझे पहुंचने का कोई साधन  नहीं है, मैं उस अल्लाह (ईश्वर) के नाम पर। जिस ने तुझको अच्छा रंग और एक अच्छा कौशल दिया, मैं आपसे एक ऊंट मांगता हूं जिस से सवारी कर के और अपने घर पहुंच जाऊं उन्होंने कहा, "आप यहां से दूर हो।" मुझे और अधिकार देने की जरूरत है। आपको इसे देने का कोई कारण नहीं है। देवदूत ने कहा, शायद मैं तुझे जानता हूं। क्या तू कुष्ठ (कोढ़ी) नहीं था जिससे लोग तुम से घृणा करते थे? और क्या तू हित नहीं था? रमाया- उसने वाह क्या सुं- (खूब) यह माल तो मेरी तटबंधों से पूर्वजों के समय से चला आता है - दूत ने कहा- यदि तू झूठा है तो भगवान तुझे वैसा ही कर दे जैसा पहले था-
پھر گنجے کے پاس اُسی پہلی صورت میں آیا اور اسی طرح اُس سے بھی سوال کیا اور اُس نے بھی ویسا ہی جواب دیا-  فرشتہ نے کہا ؛ اگر تو جھوٹا ہو تو خدا تجھکو ویسا ہی کردے جیسا پہلے تھا-

फिर उसी प्रारूप में गंजे के पास आया, और इसी तरह उस से सवाल (प्रश्न) किया, और उसने भी वैसा ही जवाब (उत्तर) दिया - देवदूत ने कहा, अगर तू  झूठा है, तो भगवान उसी रूप में कर दे।
پھر اندھے کے پاس آیا؛ اور کہا؛ میں مسافر ہوں بے سامان ہو گیا ہوں آج بجز خدا کے اور پھر تیرے کوئی وسیلہ (ذریعہ) نہیں ہے - میں اُس کے نام پر جس نے دوبارہ تجھکو نگاہ بخشی تجھ سے ایک بکری مانگتا ہوں کہ اُس سے اپنی کاروائی کرکے سفر پورا کروں- اُس نے کہا بیشک میں اندھا تھا- خداوند تعالیٰ نے محض اپنی رحمت سے مجھکو نگاہ بخشی؛ جتنا تیرا جی چاہے لےجا اور جتنا چاہے چھوڑ جا- خدا کی قسم کسی چیز سے منع نہیں کرتا-
فرشتہ نے کہا کہ تُو اپنا مال اپنے پاس رکھ مجھکو کچھ نہیں چاہئے فقط تم تینوں کی آزمائش منظور تھی سو ہو چکی- خدا تجھ سے راضی ہوا اور ان دونوں سے ناراض-
फिर वह अंधे के पास आया, और कहा, 'मैं एक यात्री हूं, मैं ईश्वर के बिना और तेरे पास संसाधनों का कोई स्रोत नहीं है। मैं तुझ से एक बकरी की मांग करता हूं, उसी के नाम पर जिसने दोबारा फिर तुझको दृष्टि (नज़र) दिया। जिस से कार्य करके, अपनी यात्रा पूरी कर सकूं - उन्होंने कहा, "वास्तव में, मैं अंधा था।" सर्वशक्तिमान ने मुझे अपनी दया के साथ दृष्टि  दिया, जितना दिल चाहे लेजा, और जितना चाहें उतना छोड़ जा।
देवदूत ने कहा, तू अपना धन अपने पास रख, मुझको कुछ नहीं चाहिए। केवल तुम तीनों की परीक्षण पारित किए गए।  भगवान ने तुझ से प्रसन्न हुआ और उन दोनों से क्रोधित हुए।

فائدہ

خیال کرنا چاہیئے کہ ان دونوں کو ناشکری کا کیا نتیجہ ملا کہ تمام نعمت چھن گئی اور جیسے تھے ویسے ہی رہ گئے اور خدا ان سے ناراض ہوا- دنیا اور آخرت دونوں میں نامراد رہے- اور اِس شخص کو شکر کی وجہ سے کیا عوض ملا کہ نعمت بحال رہی اور خدا اُس نے خوش ہوا اور وہ دنیا اور آخرت دونوں میں شاد وبامراد ہوا-

लाभ

यह माना जाना चाहिए कि उन दोनों की निराशा का परिणाम यह था कि सभी आशीर्वाद छिन गए और जैसे थे वैसे ही हो गए , और भगवान उनसे नाराज हुए- और इस व्यक्ति को शुक्र की कारण दुनिया और आखरत (मरने के बाद वाली ज़िन्दगी) आशीषें मिलीं।

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